शनिवार, 15 फ़रवरी 2025

Strength Of Devotion And Concentration , कहानी निष्ठा और एकाग्र मन की

एक समय में एक ही काम करो और उसे पूरी निष्ठा के साथ करो" - स्वामी विवेकानंद जी 

 

कहानी: एकाग्र मन की 


 एक लड़का था, नाम था कबीर,जो बहुत ही मेहनती था, लेकिन उसका मन कभी भी किसी एक काम पर नहीं टिकता था। वह कभी पढ़ाई के बारे में सोचता तो पढ़ाई करने लगता, तो कभी अन्य बच्चों को क्रिकेट खेलते देखता तो क्रिकेट खेलने लगता, तो कभी पेंटिंग बनाता, तो कभी नए विचार या बिजनेस आइडियाज के बारे में सोचता। लेकिन कभी किसी भी काम में वह सफल नहीं हो पा रहा था। 



उसके माता-पिता उसके अध्यापक बड़े बुजुर्ग और दोस्त भी उसे समझाते रहते थे कि, उसे किसी एक लक्ष्य पर फोकस करना चाहिए और उसी में जी जान से जुट जाना चाहिए, लेकिन कबीर को लगता था कि उसके अंदर हर प्रकार के गुण हैं और वह सब कुछ एक साथ कर सकता है। उसको अपने ऊपर अति आत्मविश्वास था | लेकिन वह अपने मन को कंट्रोल नहीं कर पाता था और न ही किसी भी काम को पूरा ही कर पाता था | 


एक दिन कबीर एक बड़े तेजस्वी गुरु से मिला और जो उसकी  अपनी समस्या थी खुल कर बताई। गुरु उसकी बात सुनकर मुस्कुराए और फिर बोले, " तुम कल सुबह नदी के किनारे आना, तो मैं तुम्हें कुछ महत्वपूर्ण बात बताऊंगा।"


तो अगले दिन कबीर समय से गुरु के बताए हुए स्थान पर पहुंच गया | अब गुरु ने कबीर को एक कटोरा देकर कहा, " जाओ इस कटोरे में पानी भरकर मेरे पास लाओ, लेकिन ध्यान रखना कि, इस कटोरे से एक बूंद भी पानी नीचे गिरना नहीं चाहिए।" कबीर ने कटोरा लिया और धीरे धीरे नदी की ओर चला गया।


लेकिन जैसे ही वह कटोरे में पानी भरकर वापस लौटने लगा, उसका ध्यान चिड़ियों चहचहाहट, आस पास में बहती हवा की सरसराहट और खेत खलिहानों मैदानों में खेल रहे बच्चों की तेज आवाजों की ओर चला गया। इस प्रकार वह हर एक चीज जो उसके आस पास घटित हो रही थी उसको देखना और सुनना चाहता था, और उसी दौरान उसके कटोरे से थोड़ा पानी छलक कर नीचे गिर गया। जब वह गुरु के पास पहुँचा, तो कटोरे में बहुत कम पानी बचा था।


फोकस का महत्व


गुरु ने ये सब देखकर कबीर से मुस्कुराकर पूछा, "क्या तुमने कटोरे में भरे पानी को बचाने पर पूरा ध्यान दिया था?"


तब कबीर ने सिर झुका लिया और बोला, "नहीं, गुरु जी मेरा ध्यान मेरा मन इधर-उधर भटक गया था।"


गुरु ने कहा, "कबीर तुम्हारी सबसे बड़ी यही समस्या है। कि जो तुम एक ही समय में कई चीजों पर ध्यान देने की कोशिश करते हो, और उसी के कारण तुम किसी भी काम में पूरी तरह सफल नहीं हो पाते। अगर तुमने सिर्फ कटोरे पर अपना पूरा ध्यान और मन केंद्रित किया होता, तो कटोरे का सारा पानी बचा होता। 

हमारे जीवन में भी यही नियम लागू होता है – अगर तुम किसी एक लक्ष्य पर पूरा ध्यान नहीं लगाओगे, तो सफलता नहीं मिलेगी।"


कबीर के मन का परिवर्तन


इस सीख ने कबीर के मन को ही बदल दी। उसकी पूरी सोच ही बदल गई | अब उसने अनेक कार्य न चुनकर केवल अपने जीवन का एक ही लक्ष्य चुना और पूरी निष्ठा और ईमानदारी के साथ उसे पूरा करने में लग गया|देखते देखते कुछ ही वर्षों में, वह अपने क्षेत्र में सफल हो गया और लोगों के लिए प्रेरणा और आदर्श बन गया।


कहानी की शिक्षा 


युवा सम्राट स्वामी विवेकानंद जी ने कहा था, "एक समय में केवल एक ही काम करो और उसे पूरी निष्ठा के साथ करो।" जब हम अपने मन को अपने ध्यान को भटकाते हैं, तो हमारी ऊर्जा हमारी ताकत बंट जाती है और हम किसी भी काम में उत्कृष्टता प्राप्त नहीं कर पाते। अगर हम अपने जीवन में सफलता चाहते हैं, तो हमें उस लड़के कबीर की तरह एक बार में एक ही लक्ष्य पर केंद्रित होकर काम करना होगा।


कहानी का निष्कर्ष


तो मित्रों अगर आप भी अपने जीवन में सफल होना चाहते हो, तो "एक समय में एक ही काम करो और उसे पूरी निष्ठा और ईमानदारी के साथ करो।" यही सफलता का असली रहस्य है!


मित्रों आपको ये कहानी कैसी लगी, कमेंट में जरूर बताएं और अपने दोस्तों को इस प्रेरणादायक विचार को जरूर शेयर करें  , जय हिंद  

रविवार, 2 फ़रवरी 2025

Success key in life , 80/20 का नियम

 

80/20 का नियम क्या है?

 मित्रों जीवन में सफलता ( success ) सभी पाना चाहते हैं और प्रत्येक व्यक्ति इसी के लिए दिन रात अपने अपने स्तर से लगे रहते हैं / व्यवसाई अपने व्यवसाय में अधिकतम सफल (success) होना चाहता है तो विद्यार्थी अपनी शिक्षा(education) और करियर ( career) को बनाने में / एक खिलाड़ी सबसे आगे रहना चाहता है / अतः मेहनत (hard work) तो सभी करते हैं पर सफलता ( success )कितनों को मिलती है ? एक मजदूर पूरे दिन मेहनत यानि कड़ी मेहनत ( hard work) करता है, पर भारत जैसे देश में कितना कमा ( earn ) लेता है ? मात्र 400 या 500 रुपए ! इसी प्रकार जानवरों में गधा सबसे ज्यादा काम करता है, पर कितना सम्माननीय है ? अर्थात एक देश की अधिकतम सम्पति मुट्ठी भर लोंगों के पास है / सभी शिक्षित लोंगों के बीच में सही ज्ञान ( education) और जानकारी ( knowledge ) कुछ ही लोंगों के पास है / खिलाड़ी तो बहुत हैं पर सफल और स्टार नाम मात्र के हैं /


ऐसा क्यों क्या आप लोंगों ने कभी सोचा है ?

आज आप सभी को एक सटीक नियम (accurate rule) बताता हूँ, जिसको यदि ईमानदारी से आप फॉलो करते हैं तो निश्चित ही अपने अपने क्षेत्र में अवश्य सफल (success) होंगे / इस नियम को सभी सफल लोग अपनाते हैं /

80/20 का नियम :-  

      इसे हम पारेतो का नियम या सिद्धांत (rule)भी कहते हैं / इसे इटली के अर्थशाष्त्री विल्फ्रेड़ो पारेटो ने सन 1896 ई. में प्रस्तुत किया था / उस समय इटली के समाज में आर्थिक विषमताएं (Economic disparities) बहुत थी / उन्होंने देखा कि देश की 80% संपत्ति देश के 20% लोंगो के पास है / और इसी विषमता को दूर करने के लिए लोगों को जागरूक करने की आवश्यकता थी और लोंगों को इस नियम के बारे में बताया गया / इस नियम को उस समय देश के विभिन्न क्षेत्रों में लागू किया जाने लगा / धीरे धीरे देखा गया कि इस नियम का चमत्कारिक प्रभाव देखने को मिलने लगा /

तो, आखिरकार 80/20  का नियम क्या है, और हम इसे अपनी जिंदगी में कैसे लागू कर सकते हैं? आइए इसे विस्तार से समझते हैं।

 

80/20 (पारेतो रूल) का नियम: बुनियादी अवधारण :- 

 तो चलिए इस सिद्धांत को विस्तार से समझकर इसे अपने जीवन में लागू करते हैं /

80/20 अर्थात पारेतो रूल का सिद्धांत है कि , किसी भी काम में सफल होने के लिए केवल काम करना ही जरूरी नहीं होता बल्कि क्या करें और क्या न करे इसको भी समझना जरूरी होता है / उदहारण के लिए दुनियां में सबसे अधिक मेहनत मजदूर वर्ग करता है लेकिन रिजल्ट के तौर पर वह सबसे गरीब होता है , इसी प्रकार भारत जैसे देशों में किसान हार्ड वर्कर होता है लेकिन उसकी जीवन की स्थिति आज भी दयनीय बनी है , जबकि उन्ही किसानों की उपज को खरीद कर व्यवसाई ( अढ़तिया ) अच्छा धन कमा लेते हैं और उनकी स्थिति बेहतर होती जाती है / इसका सीधा सा मतलब है कि परंपरागत तरीके से सिर्फ मेहनत करने से ही सफलता नहीं मिलती है बल्कि उसके लिए 80/20 जैसे रूल को अपनाना पड़ता है / यह सिद्धांत यही बताता है कि हमें 80% यानि अधिकतम सफलता हमें 20% स्मार्ट वर्क करके प्राप्त किया जा सकता है l या ऐसा समझ लीजिए कि , 20% कारणों से ही 80% सफलता मिलती है / यह नियम  हमेशा बिल्कुल सटीक अनुपात में नहीं होता, लेकिन यह सिद्धांत अधिकांश स्थितियों में सही साबित होता है।

 

80/20 का नियम हमारे जीवन में कैसे काम करता है ?

 व्यापार और कार्यक्षेत्र :-

         80/20 के नियम के अनुसार यह है कि एक संगठन या व्यवसाय की सफलता का बड़ा   हिस्सा कुछ विशेष कामों या ग्राहकों से आता है। यदि हम इन 20 प्रतिशत महत्वपूर्ण पहलुओं के बारीकियों पर ध्यान केंद्रित करें, तो हम अपने प्रयासों के द्वारा बेहतर ढंग से अपने व्यवसाय को नया  आयाम दे सकते हैं। उदाहरण के लिए, यदि किसी व्यापार का 80 प्रतिशत या अधिकतम मुनाफा कुछ ही उत्पादों या कुछ विशेष ग्राहकों या सेवाओं से आता है, तो इन विशेष सेवाओं या ग्राहकों या उत्पादों पर विशेष ध्यान देने पर ही पूरी कंपनी की आय में वृद्धि हो सकती है।

समय प्रबंधन :-

               80/20 का नियम को यदि हम अपने व्यक्तिगत जीवन में फॉलो करें तो यह हमारे जीवन को  भी बहुत प्रभावित कर सकता है। अधिकतर  हम अपने जीवन में दिनभर छोटी-छोटी गैर जरूरी  गतिविधियों या फालतू के कामों में अपना समय बर्बाद कर देते हैं, जबकि जो अधिकतम महत्वपूर्ण कार्य हैं जिससे हमारे जीवन की काया ही बदल सकती है पर ध्यान नहीं देते। अगर  हम सभी यह पहचान लें कि हमारें जीवन के वो कौन से महत्वपूर्ण 20 प्रतिशत काम हैं जो 80 प्रतिशत परिणाम दे सकते या देते हैं, तो हम सभी अपने समय का बेहतर उपयोग अपने जीवन को सफल बनाने में कर सकते हैं। उदाहरण के लिए , अगर आप विद्यार्थी हैं और आपके अध्ययन के समय में कुछ विषय या विशेष स्किल्स आपको ज्यादा प्रभावित करती हैं, तो आप उनपर कुछ विशेष ध्यान देकर अपने लक्ष्य को जल्दी हासिल कर सकते है।

 स्वास्थ्य और फिटनेस :-

      स्वास्थ्य फिटनेस में भी 80/20 का नियम लागू होता है। अगर आप हमेशा  शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ रहना चाहते हैं तो बेहतर स्वास्थ्य के लिए हमें सिर्फ कुछ विशेष और  सीमित रूप से अपने सही आहार और व्यायाम पर ध्यान देने की जरूरत होती है। 80 प्रतिशत रिजल्ट आपके द्वारा किए गए उस 20 प्रतिशत काम से आते हैं जो हम अपनी अच्छे स्वास्थ्य और फिटनेस के लिए सही तरीके से करते हैं। अगर हम अपनी फिटनेस के लिए जो कि सबसे जरूरी सबसे प्रभावी है , व्यायाम, योग और आहार को प्राथमिकता दे तो निश्चित ही अच्छे परिणाम पा सकते हैं। बहुत से लोग गलत नियम , गलत खानपान और अपनी गलत दिनचर्या के कारण मोटापे से परेशान हो जाते हैं / लेकिन अपने मन और जीभ में कण्ट्रोल न कर पाने के कारण मोटापे को कम नहीं कर पाते और धीरे धीरे blood pressure और sugar के मरीज हो जाते हैं / जब कि थोड़ी सी केयर और मेहनत से ये समस्याएँ दूर हो जाती हैं l 80/20 का नियम आपको हार्ड वर्कर नहीं बल्कि स्मार्ट वर्कर बनाता है / 

80/20 का नियम जीवन के अन्य पहलुओं में :-  

1.      रिश्ते और सामाजिक जीवन:

     80/20 के नियम से हमारे रिश्ते भी अछूते नहीं हैं / आपके दुःख में और सुख में आपके विशाल मेलजोल वालों में कुछ ही लोग आपका साथ दे पाते हैं / वही आपके करीब होते हैं और आपके जीवन को प्रभावित करते हैं / तो अगर जो हमारे दुःख सुख के साथी है उन्ही रिश्तों पर ही हम अपना ध्यान केन्द्रित करे और उन्हें सही दिशा में आगे बढाए तो बहुत सारा फिजूल का पैसा , धन और समय की बचत हो सकती है और हमारा सामजिक और आर्थिक जीवन समृद्ध और ख़ुशी भरा हो सकता है /

2     व्यक्तिगत विकास:

              जीवन के किसी भी क्षेत्र वो चाहे व्यवसाय हो , एजुकेशन हो , करियर हो, या जीवन की छोटी छोटी गतिविधियाँ सभी क्षेत्रों में 80/20 के नियम को लागू किया जा सकता है / क्योकि जीवन की बड़ी से बड़ी सफलता के कारणों पर अगर ध्यान दिया जाए तो केवल 20% कारण ही होंगे जिसके कारण आप सफल होते हैं / अर्थशास्त्र का एक नियम है कि मानव जीवन की आवश्यकताएं असीमित हैं और साधन तो सीमित हैं / ऐसे परिस्थिति में हमारी सभी आवश्कताएँ तो एक बार में पूरी नहीं हो सकती / इसीलिए हम अपनी सभी जरूरतों को उनकी जरूरतों के आधार पर लिस्टेड करतें हैं / फिर पहले जो सबसे जरूरी है पहले उसके लिए प्रयास करते हैं / फिर उसके बाद की जरूरत को पूरा करने के लिए प्रयास करते हैं / इस प्रकार क्रम से अपनी आवश्कताओं को उनकी जरूरतों के आधार पर पूरा करने का प्रयास करते हैं / अंत में बहुत सी जरूरतें जो बहुत विशेष नहीं होती हैं उन्हें हम साधनों के आभाव में छोड़ देते हैं /

इसीप्रकार 80/20 के नियम में हम सफल होने के लिए सब कुछ नहीं करते बल्कि वो करते हैं जो हमें हमारे सफलता तक पहुचने का साधक बनें /

 

80/20 का नियम कैसे लागू करें?

पहचानें कि क्या महत्वपूर्ण है:

     किसी भी काम को करने का जो उद्देश्य होता है वह है उसमे सफल होना / तो सफल होने के लिए सबसे पहले हमें अपने काम में सफलता के जो कारक हो सकते हैं उन्हें पहचानना जरूरी है / या उन गलतियों को भी पहचाचना जरूरी है जिसके कारण आप सफल होने से चूक रहे हैं / क्योकि एक सफल व्यक्ति अन्य से कुछ अलग और कुछ विशेष ही करता है / वह अलग कार्य क्या है या वह विशेष कार्य क्या है इसे लिखना जरूरी है / क्योकि वाही 20% कारक ही 80% परिणाम पैदा करते हैं / गधो की तरह जी तोड़ बिना दिमाग के मेहनत से कोई सफलता नहीं मिलती है / सफल होने के लिए कुछ ही कारक होते है न कि पूरा का पूरा काम / जिसे हम विशेष स्किल कहते हैं / उन्ही विशे यानि 20% कारण को पहचानना जरूरी है /

 अपने लक्ष्य और काम पर फोकस करें: 

काम करने के तरीकों पर ध्यान केन्द्रित करें / अपने काम के 20% गतिविधियों और कामों पर ध्यान दे लेकिन इसका यह मतलब जरा भी नहीं कि 80% कामों को भूल जाए / हमें 20% कार्य जो महत्वपूर्ण हैं उनपर विशेष नजर रखना चाहिए , उन्हें प्राथमिकता देना चाहिए / साथ ही साथ बाकी के कार्य को भी करते रहना चाहिए / उदहारण के लिए यदि किसी बच्चे ने एक एग्जाम पास करने के लिए पूरे साल बड़ी लगन और मेहनत से अपने पूरे सिलेबस को तैयार किया है / जब एग्जाम का समय आया तो उसे प्रीवियस इयर्स के पेपर सोल्व करने चाहिए , क्योकि इससे मन का डर ख़त्म होता है , कॉंफिडेंट बढ़ता है तथा साथ ही साथ पेपर देने की स्किल तय समय के अन्दर बढाती है / लेकिन ये मान लेना कि इन्ही पेपर्स से ही आपके एक्साम्स होंगे ये गलत होगा / अर्थात आपको अपने पढ़े साल भर के सिलेबस को revise करना चाहिए / जिससे आपकी पकड़ मजबूत होगी और एग्जाम में अच्छे मार्क्स आएँगे /   

समय का सही उपयोग करें:
अपने समय का सही से इस्तेमाल करने के लिए, उन सभी महत्वपूर्ण कार्यों में अधिक समय बिताएं जो वास्तव में आपके रिजल्ट्स को अच्छा बना सकते हैं । यह आपको सफलता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ने में मदद करेगा /

अपने कार्यों की निरंतर समीक्षा करें:-

    हमेशा याद रखना चाहिए कि इस धरती पर कोई भी चीज हमेशा स्थिर नहीं रह सकती / तो आपके जीवन में भी स्थितियों का बदलना लाजमी है / इसी प्रकार जो आपके सर्वाधिक महत्वपूर्ण कार्य यानि 20% कार्य हैं उनमें भी बदलाव हो सकता है , इसीलिए नियमित रूप से आपके द्वारा जो भी कार्य किये जाते है उनकी समीक्षा या आकलन होती रहनी चाहिए , और अपने लक्ष्य और प्राथमिकताओं पर ध्यान देते रहना चाहिए /

 

निष्कर्ष / सीख

    80/20 का नियम हम सभी के लिए एक ताकतवर रूल है जो हमें हमारे द्वारा किए गए प्रयासों और समय का सही तरीके से प्रबंधन करने में हमारी मदद करता है। यदि हम अपने जीवन के किसी भी कार्य में यह सिद्धांत लागू करते हैं, तो हम अधिक प्रभावी या मजबूती से अपने लक्ष्यों को हासिल कर सकते हैं। चाहे आप अपने व्यवसाय में हों, या व्यक्तिगत जीवन में, या पढाई अथवा करियर में , निश्चित ही  80/20 का नियम आपको सफलता की ओर ले जा सकता है। यदि इस नियम को आप अपने जीवन में फॉलो करते हैं , तो आप अपने जीवन को ज्यादा सरल और संतुलित बना सकते हैं, और साथ ही साथ जो सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण हैं उन पहलुओं पर ध्यान केंद्रित कर सकते हैं।

अगर आप इस सिद्धांत का पालन करेंगे तो जीवन में सफलता और संतुष्टि पाना निश्चित है।

तो दोस्तों ये आर्टिकल आप सभी को कैसा लगा कमेंट करके जरूर बताइए / और अगर 80/20 रूल को अपनाकर बताइए कि आप अपने जीवन के किस क्षेत्र में सफल हुए / जय हिन्द /

सोमवार, 10 जनवरी 2022

how to learn speaking english fluently at home / अंग्रेजी बोलना कैसे सीखे


 HOW TO LEARN TO  SPEAK ENGLISH / अंग्रेजी बोलना कैसे सीखे


दोस्तों अंग्रेजी बोलना कौन नहीं चाहता है ? हर एक विद्यार्थी का सपना होता है कि वह अंग्रेजी बोले / कैरियर , इंटरव्यू ,आपस में बोलचाल और एक स्टेटस मेन्टेन करने के लिए भी आज के माहौल में इंग्लिश बोलना सर्वोत्तम माना जाता है / बहुतों के इंग्लिश बोलने के सपने पूरे भी हो जाते हैं , और बहुतों के नहीं / अगर आप उन नाकामयाब लोगों में हैं, जो सीखना तो चाहते हैं , लेकिन अभी तक सीख नहीं पाए तो आप एक बेहतरीन प्लेटफार्म पर हैं / हम आज आपको बताएंगे कि आप अपनी अंग्रेजी सीखने की स्किल को कैसे इम्प्रूव कर सकते हैं /

अंग्रेजी बोलना सीखने के लिए सबसे जरूरी है, बोलने की प्रतिदिन प्रैक्टिस करना / बिना प्रैक्टिस के सारे ज्ञान होने पर भी आप अंग्रेजी बोलना नहीं सीख सकते हैं / याद रखिए जिस प्रकार लिखने से लिखना आता है , पढ़ने से पढ़ना आता है ,उसी प्रकार बोलने से बोलना आता है /

अब बात आती है कि, जब हमें अंग्रेजी का अल्फाबेट तक नहीं पता तो अंग्रेजी बोले कैसे ?

जी हाँ, एक एक स्टेप हम आपको बताते हैं कि, शुरुवात कैसे करनी है / बस आप अपने मन में ठान लीजिए कि, कुछ भी करना पड़े, लेकिन मै तो अंग्रेजी बोल के रहूँगा /

अंग्रेजी बोलना सीखने के लिए आपको निम्नलिखित चीजों पर लगन से क्रमवार काम करना होगा /

  •    WORD MEANING प्रतिदिन याद करना है – आप अपने वोकैब पॉवर को जितना स्ट्रोंग करेंगे आप उतने ही अच्छे वक्ता बनेगे / इसीलिए प्रतिदिन 10 WORD MEANING आपको याद करना है / अगर एक दिन में 10 WORD MEANING आप LEARN करते हैं तो 30 में 300 WORD MEANING तैयार होती हैं / तो साल भर में यानि 365 दिन में 3650 WORD MEANING तैयार होती हैं / और अगर इतने शब्द कोष आपके पास है तो आपको अंग्रेजी बोलने से कोई नहीं रोक सकता है /
  • 2.     अखबार ,किताब , मैगजीन आदि को प्रतिदिन पढ़ना आपके पास अंग्रेजी की बुक्स हो , मैगजीन हो , या अखबार हो / उसके एक से दो पैराग्राफ को प्रतिदिन आपको पढ़ना होगा / उसका अर्थ समझ आए या न आए, ये शुरुवात में मायने नहीं रखता / बल्कि आपको उनके शब्दों के उच्चारण पर ध्यान देना चाहिए / किसी एक पैराग्राफ को चुन लीजिए ,और आराम से एक एक शब्दों पर फोकस करके कई बार जोर जोर से बोलकर रीड कीजिए / इससे आपकी अंग्रेजी न बोल पाने की हिचकिचाहट ख़त्म होगी और आत्मविश्वास बढेगा /
  • 3.     पैराग्राफ से कम से कम 5 नए WORD अपने एक कॉपी पर लिखिए – ये काम आपको प्रतिदिन करना होगा / पैराग्राफ को पढ़ने के अलावा उसमें से कम से कम 5 शब्द को निकाल कर अपनी एक कॉपी में लिख लीजिए / फिर उसके बाद डिक्शनरी या गूगल से उसके हिंदी अर्थ को सर्च करके लिख लीजिए , फिर उसे भी लर्न कीजिए / ये काम आपका प्रतिदिन का होगा /
  • 4.     GRAMMAR जैसे TENSE, PREPOSITION, ACTIVE & PASSIVE VOICE आदि का अच्छा अभ्यास कीजिए --- सीधे शब्दों में कहें तो ग्रामर को बन्दूक तो वर्ड मीनिंग को उसकी गोली कहते हैं / इसीलिए दोनों पर अच्छा अभ्यास करना होगा / इसके लिए आप किसी अच्छे अध्यापक की मदद ले सकते हैं / या YOU TUBE के बहुत से CHANNALS का सहारा ले सकते हैं /

5.     अब आपको केवल और केवल अभ्यास करना है --- अभ्यास को आप छोटे छोटे पार्ट में बाट सकते हैं जैसे ---

1.     शुरुवात आप WORD MEANING से  करते हैं-  एक बारगी आप इंग्लिश नहीं बोल सकते हैं / इसीलिए स्पोकन की शुरुवात भी आप शब्दों से ही करिए / जैसे आपके घर में , आस-पास , पड़ोस आदि में जो भी चीजे हैं , अभी तलक आप उसे अपनी भाषा या हिंदी में बोल रहें होंगे / लेकिन अब आप उस वस्तु की इंग्लिश मीनिंग सर्च करके उसे इंग्लिश में बोलिए / जैसे रसोई को KITCHEN , किताब को BOOKS , चम्मच को SPOON , सुबह के नाश्ते को BREAKFAST आदि ऐसे ऐसे करके धीरे धीरे अपनी आदत बनाना शुरू कीजिए /

याद रखिए , करत करत अभ्यास के जड़मति होई सुजान //  

2.     ग्रामर के साथ छोटे छोटे फ्रेजल VERBS को स्पोकन में यूज़ कीजिए --- SIT DOWN , STAND UP, GET UP, PAY ATTENTION , FREAK OUT, LET DOWN , TRUST ME , LOOK AFTER, KEEP BACK, CUT IN आदि ऐसे अनगिनत फ्रेजल VERBS हैं , जिनको याद करके आप अपने स्पोकन को स्मार्ट बना सकते हैं, और एक अच्छी इंग्लिश बोलने के लिए इसे जरूर याद कीजिए और प्रैक्टिस में लाइए /

3.     आईने के सामने बैठ कर बोलने की कोशिश कीजिए --- अगर आपका साथ देने के लिए कोई नहीं है, तो ये प्रयोग बहुत ही कारगर है कि, आप आईने के सामने बैठ कर बोलने की प्रैक्टिस कीजिए / इससे आपकी झिझक ख़त्म होगी ,और बोलने की आदत बनेगी / 

4.     छोटी-छोटी स्टोरी इंग्लिश में लिखिए और बोलने की कोशिश कीजिए --- जैसे जैसे आपकी ग्रामर और वोकैब स्ट्रोंग होने लगे , वैसे-वैसे नए-नए टॉपिक को लेकर बोलने की कोशिश कीजिए / धीरे-धीरे, छोटी-छोटी स्टोरी लिखिए , फिर उसे धीरे-धीरे बोलिए, बार-बार प्रयास कीजिए / इससे आपकी FLUENCY बढ़ेगी, और आप एक अच्छे वक्त बनेंगे /

5.     एक अच्छा वक्ता वही होता है जो एक अच्छा श्रोता होता है --- इस कहावत को आपने जरूर सुना होगा कि एक अच्छा वक्ता वही बन सकता है जो एक अच्छा  श्रोता होता है / इसीलिए आपको इंग्लिश मूवी , इंग्लिश स्पीच को प्रतिदिन सुनना चाहिए / इससे आपकी इंग्लिश शब्द और वाक्य को समझने की शक्ति बढेगी / क्योकि सिर्फ बोलना ही जरूरी नहीं है बल्कि सामने वाले की इंग्लिश स्पीच को सुनकर समझना भी जरूरी है / इसके लिए आप YOUTUBE पर तमाम इंग्लिश वक्ताओं के स्पीच का सहारा ले सकते हैं l

एक बात आपको निश्चित रूप से समझना होगा कि किसी भी चीज का SHORTCUT अपनाने की कोशिश न कीजिए , और ऐसा भी न समझिए बस कुछ ही दिनों में आप सीख ही जाएंगे ! ये आपके मेहनत , लगन और निष्ठा पर निर्भर है कि, आप कितनी जल्दी इंग्लिश सीख जाते हैं / आपको प्रतिदिन इस काम को अपनी दिनचर्या में शामिल करना होगा /और लगातार प्रैक्टिस करनी होगी / आपका प्रत्येक दिन पिछलें दिन से बेहतर जा रहा है, आप इम्प्रूव हो रहे हैं कि नहीं इस पर फोकस करिए /

     इन सब महत्वपूर्ण टिप्स को आजमाकर आप एक अच्छे स्पीकर बन सकते हैं / तो इसे आजमाइए और अपनी इम्प्रूवमेंट को हमसे भी शेयर कीजिए //

शुक्रवार, 17 सितंबर 2021

शहीदे आज़म ऊधम सिंह :- अंतिम संकल्प जो कर दिखाया

 

शहीदे आज़म ऊधम सिंह :- अंतिम संकल्प जो कर दिखाया  


दोस्तों संकल्प की ताक़त से बहुतों ने ऐसे-ऐसे काम किए हैं, जो देखने में बिलकुल असंभव सा प्रतीत होता है / वास्तव में संकल्प लेने के बाद अगर, आपके अन्दर उसे पूरा करने का जूनून हो तो, परिस्थितयां कोई मायने नहीं रखती हैं , बस आपको अपने संकल्प को पूरा करने के लिए जान की बाजी तक लगाने के लिए तैयार रहना है /

आज हम आपको एक ऐसे ही देशभक्त की कहानी सुनाते हैं , जिसे सुनकर अच्छे अच्छों के रोगटे खड़े हो जाते हैं ,और हर एक देशभक्त भारतीय का सर गर्व से ऊंचा हो जाता है , और श्रद्धा से मस्तक अपने आप उनकी स्मृति में झुक जाता है /

जब देश अंग्रेजों का गुलाम था , तो उस गुलाम भारत में एक अंग्रेज अधिकारी जो की बहुत ही कुख्यात और क्रूर था, शासन करने के लिए भेजा गया था / उसका नाम था डायर / पंजाब राज्य के अमृतसर में उसकी पोस्टिंग हो गयी थी / आते ही उसने एक रालेट एक्ट नाम का क़ानून बना दिया था / उस एक्ट के विरोध में 14 अप्रैल 1919 में जलियांवाला बाग़ में एक बड़ी जन सभा हुई थी , जिसमें करीब 25 हजार देशभक्त भारतीय शामिल हुए थे / जलियावाला बाग़ के उस आम जनसभा पर डायर ने चारों तरफ से घेराबंदी करके अंधाधुंध गोलियां चलवाई थी /

                        


दोस्तों जानकारी के लिए आपको बता दें कि, 
15 मिनट में 1650 राउंड गोलियां उस जलियावाला बाग़ में चली थी / अगर कोई दोस्त आर्मी या पुलिस में हो तो वह अच्छे से अंदाजा लगा सकते है कि, चारों तरफ से घेर कर 1650 राउंड गोलियां चलवाने का क्या अभिप्राय हो सकता है / चारों तरफ सिर्फ लाशें ही लाशें दिख रही थी , लोग एक एक करके तड़प तड़प कर मर रहे थे / चारों तरफ कोहराम मचा था ,अपने आपको को बचाने के लिए लोग इधर उधर भाग रहे थे, और गोलियों के शिकार हो रहे थे / तीन हजार से ज्यादा क्रांतिकारी वही शहीद हो गए थे /

अगर आप में कोई जलियावाला बाग़ गया हो तो, आपको जरूर पता होगा कि जलियावाला बाग़ में अन्दर जाने और बाहर निकलने का सिर्फ एक ही दरवाजा है ,और वो भी लगभग से फिट केवल / इसके अलावा पूरा का पूरा जलियावाला चहार दीवारी से घिरा हुआ है / जो एक मात्र दरवाजा है, उस पर डायर ने तोप लगा रखी थी ,कि कोई भी जीवित बच कर भाग न पाए / उस जलियावाला बाग़ में दो कुँए भी हैं , जिन्हें आज अंधे कुँए के रूप में जाना जाता है /

जब 15 मिनट में चारों तरफ से डायर ने ताबड़तोड़ 1650 राउंड गोलियां चलवाई तो जान बचाने के वास्तें बहुत लोग उस कुँए में कूद गए ,और देखते ही देखते पूरा का पूरा कुंआँ लाशों से भर गया , मृत शरीरों से पट गया / गोली चलवाने के बाद  डायर हसतें और खिलखिलाते हुए वहां से चला गया , और इससे भी उसका मन नहीं भरा तो रास्ते में जाते हुए अमृतसर के सडकों के दोनों तरफ जो भी भारतीय दिखता उसे भी भून डालता और तोप के मुहं से रस्सी से बांधकर घसीटता चला गया /

इस काम के लिए उसे अंग्रेजी सरकार की तरफ से ईनाम भी मिला / उसका प्रमोशन हुआ ,पदोन्नति हुई और उसे भारत से लन्दन भेज दिया एक बड़े पद पर /

जब जलियावाला बाग़ हत्याकांड हुआ था, तो लोंगो के बीच में एक व्यक्ति शामिल था जिसका नाम था ऊधम सिंह / उस समय ऊधम सिंह की उम्र लगभग मात्र 11 या 12 साल की हुआ करती थी / चूंकि उस समय वो भी वहां थे, और उस हत्याकांड को अपनी आँखों से देखा था , तो डायर के लिए उनका खून खौल गया था, और उसी क्षण उन्होंने संकल्प ले लिया था कि, जिस डायर ने क्रूरता के साथ मेरे भारत के निरपराध वासियों की हत्या की है, मैं उस डायर को नहीं छोडूंगा / यह मेरे जीवन का आखिरी संकल्प है / और इस असंभव संकल्प को पूरा करने के लिए शहीदे आज़म ने कोई कसर नहीं छोड़ी /

दोस्तों मैंने इस संकल्प को असंभव कहा क्योकि शहीदे आज़म ऊधम सिंह की जो परिस्थिति थी , उसके हिसाब से ये करना असंभव ही था / क्योकि शहीदे आज़म ऊधम सिंह घर से अत्यंत गरीब थे / माता – पिता का साया उनके सर से उठ चुका था ,अनाथ आश्रम में पले बड़े हुए थे / एक बड़े भाई थे , जिनकी किसी बीमारी के कारण मृत्यु हो चुकी थी / अपने परिवार में वो एकदम बिलकुल अकेले रह गए थे / आर्थिक संसाधन के रूप में उनके पास कुछ भी नहीं था / आखिर ऐसा व्यक्ति डायर को कैसे मारता वो भी लन्दन जाकर जिसके पास कुछ था ही नहीं /

लेकिन शहीदे आज़म संकल्प ले चुके थे , भारत माता के इस लाल का रक्त बदला लेने ले लिए उबाल खा रहा था / उन्होंने योजना बनाई कि लन्दन जाना है और लन्दन जाने के लिए पैसे चाहिए / और पैसों का इंतजाम कैसे हो ? तो उन्होंने तय किया कि किसी के सामने हाथ फैलाऊँ ,उससे अच्छा है कि मेहनत मजदूरी करके पैसे कमाऊँ / तो उन्होंने कारपेंटरी यानि बढई गीरी का काम सीखा , और काफी दिनों तक इस काम को करते करते इतना पैसा जमा कर लिए कि वो अमेरिका पहुँच गए ,और अमेरिका से लन्दन पहुँच गए / शहीदे आज़म ने लन्दन पहुँच कर फिर एकबार एक होटल में काम करना शुरू किए ,पानी पिलाने का काम किया / ताकि जो पैसे इकट्ठे हों उनसे बन्दूक या पिस्तौल खरीदी जा सके /

आप सभी को बता दें कि ये सब काम करते करते शहीदे आज़म ऊधम सिंह को 21 साल लग गए / जी हाँ 21 साल / जलियावाला बाग़ हत्याकांड 1919 में हुआ था और शहीदे आज़म ऊधम सिंह ने 1940 में अपना संकल्प पूरा कर पाए थे / दोस्तों 21 साल पैसों के लिए परिश्रम के साथ अपने सम्पूर्ण जीवन को लगाते हुए सिर्फ और सिर्फ अपने संकल्प के लिए जिन्दा थे /

21 साल बाद सन 1940 में लन्दन में एक जगह है किंगसन पैलेस , वहां पर डायर का एक बड़ा कार्यक्रम हो रहा था / उसकों मालाएं पहनाई जा रही थी और उसका सम्मान किया जा रहा था / उस कार्यक्रम में ऊधम सिंह जी भी पहुँच गए थे / और मौक़ा पाते ही अपनी जेब से रिवाल्वर निकालकर ताबड़तोड़ तीन गोलिया डायर को मारी / डायर वही पर मर गया / और डायर को तीन गोलियां मारने के बाद शहीदे आज़म ऊधम सिंह ने सिर्फ एक वाक्य कहा था  आज मैंने 21 साल पहले का मेरा संकल्प पूरा किया है ,और मैं इसके बाद अब एक मिनट भी जिन्दा नहीं रहना चाहता / अब मुझे एक मिनट भी जिन्दा नहीं रहना है/ अब मेरे दिल की इक्षा पूरी हुई है /

इसके बाद उन्होंने एक अंग्रेज अधिकारी को अपना रिवाल्वर सौपा / तो अंग्रेज अधिकारी के हाथ काँप रहे थे कि, कहीं ये मुझे भी न मार दे ? तो ऊधम सिंह जीने कहा घबराओ मत / मेरी तुमसे कोई दुश्मनी नहीं है / मेरी दुश्मनी तो डायर से थी ,जिसने मेरे देश के हजार लोंगों को मारा था /

क्रांतिकारियों का इतना ऊंचा आदर्श कि जो संकल्प लिया उसी के लिए पूरा जीवन खपा दिया / परिस्थितयां कुछ भी रही हों ,लेकिन जो ठान लिया तो उसी की पूर्ति के लिए क्या 10 साल क्या 15 या 20 साल , बस जीना है तो भारत माता के लिए और मरना है तो उसी के लिए /

जो हाथ में लिया तो पूरा किया , नहीं कर पाए तो शहीद हो गए / और आज उन्ही संकल्पों की बदौलत हम आजाद देश की हवा ले रहे हैं / ऐसे देश भक्त शहीदे आज़म श्री ऊधम सिंह जी को मेरा सत सत नमन /

तो दोस्तों आपको शहीदे आज़म की इस सच्ची दास्तान से क्या सबक मिला और आपको ये कैसी लगी COMMENT BOX में जरूर लिखकर बताइए //

जय हिन्द // 

बुधवार, 28 जुलाई 2021

The Keys Of Success In Hindi, Napoleon Hill

  एक कदम सफलता की ओर  Napoleon Hill 

नेपोलियन हिल एक अमेरिकी लेखक हैं / उन्होंने कई रचनाएं लिखी हैं / उनकी एक पुस्तक THINK & GROW RICH “ बहुत ही प्रसिद्ध है / इस पुस्तक की बहुत सी बातें प्रैक्टिकली हैं और जीवन के लिए बहुत ही कारगर हैं / सक्सेस की दृष्टी से अगर इन बातों को अपने जीवन में प्रत्येक व्यक्ति ढाल ले तो जीवन में निराशा कभी नहीं होगी / तो आइए कुछ बातों को आपसे शेयर करते हैं ......



सही समय कभी नहीं आता ,इसीलिए जीवन में इंतज़ार मत करिए ---

आपके जीवन का एक एक पल कीमती है / आप अपने मन के अनुसार जिस समय का इंतज़ार कर रहे हैं , वो इस जीवन में तो कभी नहीं आने वाला / क्योकि आपके मन के अनुसार किसी काम को करने में व्यवधान न उत्पन्न हो , सारे संसाधन आपके पास पहले से मौजूद हों ,समय परिस्थिति आपके अनुकूल हो , तब आप काम की शुरुवात करेंगे / ऐसा समय आना संभव नहीं है / हथेली की पांच अंगुलियाँ भी एक बराबर नहीं होती हैं / इसीलिए आप अभी से ही तत्काल अपने काम की शुरुवात कर दीजिए / उसके लिए किसी ख़ास समय का इंतज़ार मत कीजिए /

महापंडित रावण के वचन हैं कि शुभस्य शीघ्रम ,अशुभस्य कालहरणं अर्थात शुभ कार्य को जितनी जल्दी हो सके कर डालें, क्योकि शुभ कार्य के परिणाम भी शुभ होतें हैं, और जो समय बीत जाएगा वो दुबारा नहीं आएगा /और बुरे काम को जितना टाल सके टालते रहें, क्योकि इसी में आपकी भलाई है / परिणाम भी वैसे ही होंगे / समय गुजर जाने दें /

दिमाग के बिना पैसा जीवन में खतरनाक होता है ---- 

आप पहले पैसे के पीछे मत भागिए ,बल्कि अपनी स्किल को विकसित करने का प्रसास कीजिए / खुद पर उस लायक बनाने का प्रयास कीजिए /सफलता पाना आसान है , पर उसे कायम रखना मुश्किल है / इसीप्रकार पैसा कमाना आसान है पर उसका उपयोग अगर बुद्धिमानी से न किया जाए ,तो पैसे का आपके पास टिकना मुश्किल हो जाएगा /

तो पहले आप उस जिम्मेदारी को संभालने के लायक खुद को बनाइए , जो जिम्मेदारी आप लेना चाहते हैं , यानि जैसी सफलता आप चाहते हैं /सफलता खुद बखुद आपके पास चली आएगी / और इसके साथ वो कायम भी रहेगी /

संसार में ऐसे बहुत से उदाहरण भरे पड़े हैं / बहुतों के पास बहुत धन होने पर भी , उसका निवेश सही जगह न हो पाने कारण वे लोग निर्धन हो गए / और बहुत लोग ऐसे भी हैं ,पाई पाई जोड़कर करोडपति बन गए / ये कोई भाग्य का खेल नहीं है ,बल्कि आपकी खुद की समझ और स्किल पर निर्भर है /

प्रत्येक कामयाबी और धन की शुरुवात सिर्फ एक विचार की उत्पत्ति का परिणाम होता है ----  

कर्म ही जीवन है इस शब्द से हम सभी परिचित हैं / बिना कर्म किए परिणाम नहीं मिलता है / परन्तु प्रत्येक काम के पीछे एक विचार ,एक कल्पना की शक्ति होती है / एक फल का बीज अंकुरित होता है /उसमें उचित मात्रा में खाद, पानी, हवा, प्रकाश, देने पर वह पौध में बदल जाता है / और वही पौध एक दिन एक बड़ा पेड़ बन जाता है / और अपने से कई गुना फल देता है /

लेकिन इस सब क्रिया के पीछे सर्वप्रथम बीच का अंकुरण ही है / इसीप्रकार किसी भी सफलता के पीछे एक सटीक योजना होती है /और उस योजना के पीछे एक लक्ष्य होता है/ और वो लक्ष्य एक विचार और कल्पना का अंकुरण होता है / इसीलिए सपने देखना जरूरी है / प्रत्येक काम की शुरुवात ही सपने देखने से होती है /

किसी भी योजना ,लक्ष्य या सुझाव को बार बार मन में दोहराने से उसे मन मस्तिष्क में स्थाई किया जा सकता है ---

शाहरुख खान की एक फिल्म का डायलाग है अगर किसी चीज को दिल से चाहो तो पूरी कायनात उसे तुमसे मिलाने की कोशिस में लग जाती है/

इतनी शिद्दत से मैंने तुम्हे पाने की कोशिश की है कि हर जर्रे नें मुझे तुमसे मिलाने की साजिश की है /

ये डायलाग ऐसे ही नहीं कहा गया है ,बल्कि एक सच्चाई की तरफ इशारा करती है /आप अपने लक्ष्य को यदि बार बार लिखते हैं ,बार बार पढ़ते हैं , सिर्फ उसी के बारे में सोचते हैं ,तो वो आपके अवचेतन मन में धीरे धीरे फीड हो जाती है / जिसका कनेक्शन प्रकृति से होता है / आपकी क्षमता , आपकी लगन ,आपकी सारी ऊर्जा धीरे धीरे उसी तरफ लगने लगती है, और चमत्कारिक रूप से आपके भीतर और बाहर आपको एक दिन एक जैसा आभास होने लगेगा / और आप जिस चीज में सफलता चाहते हैं , आप सफल भी हो जाते हैं /

कल्पना की शक्ति के द्वारा ही जीवन में आपको अवसर प्राप्त होता है / कल्पना आपके मन का प्रेक्टिकल रूम है , जो आपके मन की शक्ति और ऊर्जा को सफलता और धन में बदल देती है -----

बिना सपने देखे कोई सपने पूरे भी नहीं होते हैं / सपने जीवन का आधार हैं / आज के समय में जो भी वस्तुएं , जो भी आविष्कार हैं ,वो एक कल्पना ,एक सपने देखने की ही उपज हैं /

क पेट्रोल पंप पर काम करने वाला व्यक्ति धीरू भाई अम्बानी मात्र 300 रूपए से सफ़र शरू किए और अपने अंत समय तक तक 75000 करोड़ की सम्पति बना ली थी / 3 व्यक्तियों की टीम और मात्र 43 डॉलर की रकम से शुरू की गयी सहारा ग्रुप आज कहाँ से कहाँ पहुँच गयी / मात्र 80 रूपए से शुरू होने वाली  लिज्जत पापड़ की कंपनी 500 करोड़ से अधिक का सफ़र तय कर चुकी है / ये सब सफलताएं सपने देखने और उसमें पूर्ण रूप से समर्पण का परिणाम है /

जीवन में पैसा ज्यादा और जिम्मेदारी छोटी, शायद ही कभी एक साथ पाए जाते हैं ----   

आपके सपने जितने बड़े होंगे ,आपको उतने ही बड़े प्रयास भी करने होंगे / और जैसा प्रयास होगा वैसी ही सफलता मिलेगी / ज्यादा पैसा कमाना है ,तो ज्यादा जिम्मेदारी उठानी पड़ेगी / प्रकृति हमेशा हिसाब बराबर रखती है /जैसी आपकी मेहनत होगी वैसा ही आपको परिणाम मिलेगा /

आपकी चाहतें ,अर्थात सपनें और आपके विजन को आप इस प्रकार अपने पास रखे ,और उसकी देखभाल करें जैसे वो आपके बच्चे हों ---  

अपने सपनों और विजन को आप इतना प्यार करो कि वे आपके अपने ही हो जाएं / सपने एक दीपक की लौ की तरह होते हैं / इन्हें बुझने न दीजिए / क्योकि यही सपने आगे चलकर आपके जीवन में रोशनी पैदा करते हैं /

अपनी इक्षाओं को पूरा करने के लिए एक निश्चित प्लान बनाएं , और तुरंत ही इस पर काम करना शुरू कर दें , चाहे आप तैयार हों या न हों ----

सपनों और इक्षाओं को पूरा करने के लिए एक लक्ष्य होना जरूरी है / लक्ष्य को हकीकत में सफलतम बनाने के लिए एक सटीक प्लान बनाना जरूरी होता है / जिस पर आप चलकर अपनी योजना को उपलब्धि में बदल सकें /

एक निश्चित सफलता के लिए एक निश्चित योजना का होना उतना ही जरूरी है , जितना एक पौधे को बड़ा होने के लिए पानी की जरूरत होती है /

नेपोलियन हिल के इन विचारों से आप सफलता का स्वाद चख सकतें हैं

आपका बड़ा अवसर वहीँ है जहां आप अभी हैं – नेपोलियन हिल

ये पोस्ट आपको कैसी लगी COMMENT BOX में जरूर COMMENT करें /

जय हिन्द //

Featured Post

Insurance को खर्च नहीं, सुरक्षा क्यों माना जाता है?

Insurance को खर्च नहीं, सुरक्षा क्यों माना जाता है? एक बात जो मुझे Insurance Industry में काम करते हुए बार-बार महसूस हुई... अगर आप पिछले कुछ...