शनिवार, 17 जुलाई 2021

जीत की जिद / How to insistence to win

 जीतने के लिए जिद्दी होना जरूरी है  @INSISTENCE 

सबसे बड़ा रोग क्या कहेंगे लोग जब लोग अपनी जिन्दगी की कमान दूसरों के हाथ में दे देते हैं / उन्हें अपने से ज्यादा दूसरों की विचारों की फिक्र होती है कि अगर मैंने ऐसे किया तो लोग क्या कहेंगे ,तो समझो सत्यानाश हुआ /

जिस प्रकार नदी के पानी का आकर्षण समुद्र की तरफ होता है / उसके बहाव में लाख अड़चने आए लेकिन अंततः पानी समुद्र में जाकर ही मिलता है / ठीक इसीप्रकार यदि आपके दिमाग का आकर्षण आपके लक्ष्य की तरफ हो जाए तो आपको सक्सेस पाने से कोई नहीं रोक सकता है /

वो अड़चने कौन कौन सी हैं जो हमें हमारी मंजिल तक पहुँचने से रोकती है ?

डर ,गरीबी ,अशिक्षा , अनिर्णय , गलत आदतें , टालमटोल ,आलस ,खुद पर विश्वास की कमी , देर से उठना , आदि ऐसी जिद्दी अड़चने हैं जो अपने जिद के कारण आपको आपके सक्सेस तक कभी नहीं पहुँचने देती हैं / और हम लोग जानते हुए भी इसके चंगुल में फंस जाते हैं / और परिस्थतियों से दो दो हाथ करने की जगह हम इसकी दासता स्वीकार कर लेते हैं , और भाग्य को दोष , परिवार को दोष , देने लगते हैं /

जिस प्रकार लोहा लोहे को काटता है ,उसी प्रकार इस अड़चन रुपी जिद को हमें खुद के विश्वास के जिद से काट कर आगे बढ़ना होगा / तभी सफलता संभव है / और ये कठिन भी नहीं है /बस हमें इसके लिए जिद्दी बनना पड़ेगा / तमाम सफल लोंगों ने ऐसा ही किया है / जब वो सफल हो सकते है तो आप क्यों नहीं ?  

जिद या दृढ़ता हमारे दिमाग की एक अवस्था है , जगाने के लिए निम्न कारको को तैयार करना होगा 

  • निश्चित उद्देश्य— सबसे पहले आपको भलीभांति पता होना चाहिए , कि आप वास्तव में क्या चाहते हैं ?क्योकि जब तक आपके पास एक मजबूत मकसद नहीं होगा ,आप हमेशा भटकते रहेंगे /

एक लक्ष्य विहीन मनुष्य ,बिना नाविक के उस नाव के सामान होता है , जो नदी में बहती तो है पर उसका किनारा कहाँ आएगा ,कुछ भी पता नहीं होता / और अंत उसका डूबना लगभग तय ही होता है/

  • इक्षाशक्ति आपके द्वारा लक्ष्य की प्राप्ति में आपकी चाहत , आपकी इक्षा कमजोर नहीं बल्कि जुनूनी होनी चाहिए / तीव्र होनी चाहिए /

हम अपनी इक्षाशक्ति पर दृढ तभी होते हैं , जब हमें उस लक्ष्य की वास्तव में तीव्र आवश्कता होती है /या वो लक्ष्य हमें अत्यधिक प्रिय या पसंद हो /

  • आत्मनिर्भरता या स्वयं पर विश्वास --- आप एक लक्ष्य पर तभी दृढ हो सकते हैं जब आपको खुद पर विश्वास हो / क्योकि पानी भी तभी उबलता है जब वह 1000c होता है /इसी प्रकार आपको स्वयं पर विश्वास होना चाहिए कि चाहे कुछ भी हो जाए ,अब हमें पीछे नहीं हटना है / यही प्रतिज्ञा आपको हठी बनाएगी / और आप विजय के मार्ग पर निश्चय ही प्रशस्त होंगे /
  • निश्चित योजना  लक्ष्य कितना भी कठिन हो ,लेकिन अगर लक्ष्य तक पहुँचने के लिए सुगम मार्ग हो या एक सही योजना हो ,तो स्वंय के विश्वास में वृद्धि होती है और आपमे अधिक दृढ़ता आती है / कि अब आपकी जीत तय है /
  • सटीक ज्ञान के आधार पर योजना बनाएं अगर आपने जो योजना बनाई है , गहन अध्ययन के द्वारा बनाई है ,उसका सही अवलोकन किया है तो आपकी दृढ़ता और भी पक्की हो जाएगी / योजना अनुमान से नहीं बल्कि अनुभव और विशेष ज्ञान के आधार पर बनाना चाहिए /
  • आदत  वैसे कहा जाता है की हमारी आदते ही हमारे सफलता या असफलता की सूचक होती हैं /जब हम अपने लक्ष्य तक पहुचने के लिए अनुकूल आदतों को विकसित करने लगते हैं / अपने अन्दर के डर को अपने लक्ष्य पर ध्यान केन्द्रण के द्वारा दूर करने का प्रयास करते रहते हैं / और धीरे धीरे हम आत्मविश्वासी होते जाते हैं ,और यही विश्वास हमें अपनी जीत के प्रति हठी बना देता है /
  • लगातार प्रयास करते रहना – लक्ष्य पर पहुँचने की सबसे सटीक सीढ़ी है निरन्तर प्रयास करते रहना / मैं तो लगातार प्रयासरत होने की क्रिया को सर्वश्रेष्ठ मानता हूँ / क्योकि देखा गया है कि अधिकतर लोंगो के फेल होने का कारण अपने काम को लगातार न करना है यानि मूड के अनुसार करना रहा है /

    लाख प्रतिभा हो , आप बहुत ज्ञानी हों ,लेकिन अगर प्रतिभा को तरासने के लिए जो अवसर आपके पास है उसमें सही ठंग से काम नहीं किया तो कुछ दिनों बाद आपकी ये प्रतिभा सिर्फ कागजों पर ही रह जाएगी / आपका ज्ञान तभी तक है जब तक आप किताबों से जुड़े हैं और उसका सही इस्तेमाल कर रहें हैं / अपने दिमाग को नयी नयी जानकारियों से अपडेट कर रहें हैं /

  एक बार बादलों की हड़ताल हो गयी / बादलों ने कहा कि वे अगले दस सालों तक पानी नहीं बरसाएंगे / ये बात जब किसानों नें सुनी तो उन्होंने भी अपने हल हथियार वगैरह रख दिए, क्योकि बादल तो अब पानी बरसाएंगे नहीं तो हल चलाने से क्या फ़ायदा /

   लेकिन उनमें से एक किसान था जो प्रतिदिन नियमानुसार अपने खेतों में हल चलाता था / एक दिन कुछ बादल ऊपर से गुजर रहे थे / तो उन्होंने देखा कि एक  किसान अपने खेत में हल चला रहा था / तो उन्होंने उस किसान से पुछा कि –अरे भाई क्या आपको पता नहीं है कि हम बादल हड़ताल पर हैं और 10 साल तक बारिश नहीं करेंगे /

तो किसान के कहा कि अरे भाई कोई बात नहीं/ जब आप बरसेंगे तो बरसेंगे तब देखा जाएगा / लेकिन मैंने अगर 10 साल तक हल चलाना छोड़ दिया तो आने वाले समय में मैं हल चलाना ही भूल जाऊँगा /

अब यह सुनकर सभी बादल घबरा गए कि कही वे बरसना ही न भूल जाएं / और वे तुरंत ही बरसने लगे / और खेत में लगातार हल चलाने वाले किसान की मेहनत रंग ला गयी / और जो किसान अपने हथियार डाल कर सही समय का इन्तजार कर रहे थे वे सब हाथ मलते रह गए /

इसीलिए अपने काम में सफलता असफलता की चिंता किए बगैर लगे रहिए / समय आने पर सफलता आपको अवश्य मिलेगी / और यही निरंतरता की जिद ही सक्सेस का मूल मन्त्र है /

  • उन आदतों का त्याग करना जो आपको आपके लक्ष्य से दूर कराए हैं --- ये बहुत ही महत्वपूर्ण बिंदु है और मेरे हिसाब से एकमात्र सार्थक बिंदु / जिस पर काम करके आप निश्चित सफलता पा सकते हैं /

मान लीजिए आप एक व्यवसाय की शुरुवात करने जा रहे हैं और तमाम ऐसे साथी ,राय प्रधान लोग जो आपसे अपनी तमाम नकारात्मक अनुभव SHARE करके वो आपको वो काम करने से ही रोक रहें हैं / जबकि वे साथी आपको सकारात्मक और नकारात्मक दोनों विचारों से अवगत कराकर एक सही ओर POSITIVE  सलाह देकर आपके काम में आपकी मदद कर सकते थे / पर वे अपने आपको महान ज्ञानी मनवाने के चक्कर में आपका बड़ा गर्त करने बैठ गए हैं , जिसमे उनका वास्तव में खुद का रत्ती भर अनुभव नहीं है / तो ऐसे लोंगों का साथ तुरंत छोड़ देना चाहिए / क्योकि ये आपको सफल होता देखना ही नहीं चाहते हैं /

इस प्रकार से वो चाहे आदतें हों जैसे – टालमटोल की आदत , शराब की आदत , अनिर्णय , डर , आलोचना इस सबका तुरंत त्याग कर देना चाहिए / और साथ ही साथ नकारात्मक लोंगो को अपने से कोसों दूर रखिए /

इस प्रकार से जीतने के लिए निश्चित लक्ष्य , सही योजना ,दृढ़ता , स्वयं पर विश्वास बहुत ही आवश्यक है / और जब तक अपने लक्ष्य को प्राप्त न कर जाएं लगातार जुटे रहें /

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जय हिन्द //

 

 

गुरुवार, 15 जुलाई 2021

IAS NIDHI SIWACH / THE REAL SUCCESS STORY / PASSION

@NIDHI_SIWACH    एक IAS अफसर बनने की SUCCES STORY

सफलता का कोई निश्चित नियम या सूत्र नहीं होता है / होता है तो सिर्फ एक और वो है खुद पर विश्वास , और अपने उम्मीद से ज्यादा काम करना /

एक निश्चित सफलता के लिए जो भी चीजे आपको DISTRACT करती हो, या आपकी और आपके मंजिल के बीच अवरोध बनती हो, उन्हें छोड़ना पड़े तो छोड़ दो सफलता का एक मात्र यही सूत्र है /

धनुर्विद्या की परीक्षा में सभी कौरवो और पांडवों की ऋषि द्रोणाचार्य ने परीक्षा ली / बारी बारी से सभी को निशाना लगाने के लिए बुलाया / और उन्हें बता भी दिया गया की पेड़ पर एक चिड़िया की आँख में निशाना लगाना है / जब उनसे पूछा जा रहा था की तुम्हे निशाना लगाने के लिए क्या दिख रहा है ? तो कोई बोलता की उन्हें पत्ती दिख रही है , तो कोई बोलता की उन्हें पूरी चिड़िया दिख रही है , तो कोई बोलता की उन्हें तो चिड़िया दिख ही नहीं रही है , इस प्रकार से सभी शिष्यों ने अपना अपना बयान दिया की आखिर उन्हें दिख क्या रहा है/ इससे एक बात समझ आती है की उन्हें अब तक ये नहीं मालूम हो पाया था की आखिर उन्हें निशाना लगाना कहाँ है , उसी जगह पर जब द्रोण ने अर्जुन ने पूछा की तुम्हे क्या दिख रहा है, तो अर्जुन ने जवाब दिया की उन्हें तो मात्र चिड़िया की आँख दिख रही है /

अर्थात जब तक आपके द्वारा ये न मालूम हो की वास्तव में आपको करना क्या है, और लक्ष्य का पता होने पर भी आप बार बार भ्रमित हो रहे हों तो सफलता आपको नहीं मिल सकती / यानि सफलता के लिए आपका फोकस आपके टारगेट पर ही होना चाहिए / इसके अलावा आपको कुछ भी नहीं दिखना चाहिए / तभी आप सौ प्रतिशत सफल हो सकते हैं /

एक सच्ची कहानी एक IAS के जीवन की  

आज के समय में निधि सिवाच (NIDHI SIWACH)  एक जाना पहचाना नाम है, जो हरियाणा राज्य के गुरुग्राम की रहने वाली हैं / निधि जी की शिक्षा दीक्षा भी वही से हुई है / जब निधि ने 10वी कक्षा का एग्जाम पास किया ,तो इन्होने अपना लक्ष्य मैकेनिकल इंजीनियरिग को बनाया / और 12वी की परीक्षा पास करते ही निधि सिवाच ने मैकेनिकल इंजीनियरिंग में एडिमिशन भी ले लिया / मैकेनिकल इंजीनियरिग की पढ़ाई पूरी होने के बाद निधि सिवाच को हैदराबाद की एक कंपनी में नौकरी मिल गयी / और वह हैदराबाद में ही रहने लगी /

अब लगभग लाइफ सेट हो चुकी थी / नौकरी भी शानदार चल रही थी / बचपन में देखा गया सपना भी उन्होंने साकार कर लिया था / 2 साल तक जॉब भी किया /एक दिन उन्हें ऐसा लगा कि वह इस जॉब के लिए नहीं बनी है/ उन्हें तो लाइफ में कुछ अलग करना चाहिए / अब बस यही सोच कर उन्होंने ठान लिया कि उन्हें तो IAS अफसर ही बनना है/ और वो ऐसा करके जरूर दिखाएंगी /

                                       

IAS NIDHI SIWACH / THE REAL SUCCESS STORY / PASSION

IAS की तैयारी के लिए अपनी नौकरी छोड़ दी  

कुदरत का एक नियम है कि कुछ पाने के लिए कुछ न कुछ प्रतिदान करना पड़ता है / और शायद ये निधि सिवाच को बखूबी पता था , इसीलिए अपने अगले टारगेट को पूरा करने के लिए उन्होंने अपनी नौकरी बलिदान कर दिया अर्थात छोड़ दिया /

2 बार असफल भी हुई

निधि सिवाच अपनी पूरी मेहनत , लगन और शिद्दत के साथ अपनी पूरी पढ़ाई में लग गयी / अब उनका एक ही सपना था UPSC EXAM को पास करना वो भी हर हाल में /

UPSC EXAM में निधि सिवाच को दो बार असफलता मिली /इस असफलता के साथ किसी तरह निधि अपने आपको POSITIVE करने की कोशिस कर रही थी, और फिर से तैयारी के लिए खुद को तैयार कर रही थी /

शादी का प्रस्ताव घर वालों के द्वारा  

दो बार की असफलता के बाद घर वालों ने निधि सिवाच को शादी करने के लिए कह दिया ,जिसके लिए निधि तैयार नहीं थी / वो तो पहले IAS बनकर अपने सपनों को पूरा करना चाहती थी / लेकिन अपनी दो बार की असफलता और शादी के इस प्रस्ताव के बीच निधि घिर गयी / अंत में परिवार ने कहा की यदि इस बार वह इस एग्जाम को पास नहीं कर पाती तो उन्हें शादी करनी पड़ेगी /

   निधि सिवाच ने इस प्रस्ताव को मान लिया, और इसके साथ अपने मन में ये भी ठान लिया की ये उसके लिए अंतिम अवसर है , अब उसके सामने करो या मरो की शर्त है / उसे ये बात भली भाँति पता चल चुकी थी कि अभी नहीं तो कभी नहीं / अब उसने ठान लिया उसे हर हाल में UPSC  इसी वर्ष पास करना ही है /

6 महीने के लिए वैराग्य धारण कर लिया

परिवार ,शादी, व्याह, फंक्शन आदि से निधि ने एकदम दूरी बना ली / अब वो अपने आपको एक कमरे में पैक कर ली / परिवार से ज्यादा ख़ास मतलब नहीं रखती थी , क्योकि वह मानती थी कि तैयारी के समय में पारिवारिक बातें उनका ध्यान भटका सकती हैं / इसी लिए निधि सिवाच ने सोशल मीडिया आदि से भी एकदम दूरी बना ली / और सिर्फ और सिर्फ अपना पूरा फोकस एक अर्जुन की तरह अपनी पढ़ाई पर लगा दी / अब निधि के लिए उसकी किताबें ही उसकी दोस्त थी / दिन हो रात बस एक ही जूनून दिमाग में चलता था की उसे IAS हर हाल में बनना है /

बिना कोचिंग के बनी UPSC टॉपर

इस एग्जाम की तैयारी में निधि सिवाच नें अपने आपको पूर्ण रूप में समर्पित कर दिया था / और उन्होंने इसकी तैयारी के लिए कोई कोचिंग भी नहीं की थी / इस प्रकार अंततः मेहनत रंग लाई और तीसरे प्रयास में आल इंडिया रैंक में 83 रैंक हासिल कर ली /  

 इस प्रकार निधि सिवाच ने साबित कर दिया कि यदि व्यक्ति अपने लक्ष्य के प्रति पूर्ण समर्पित हैं ,और अपना पूरा ध्यान अपने TARGET पर ही रखा है तो उसे जीतने से कोई रोक नहीं सकता है /

मंजिल उन्ही को मिलती है , जिनके सपनों में जान होती है ,पंख से कुछ नहीं होता ,हौसलों से उड़ानहोती है /

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जय हिन्द //  

 

  

THE WOMAN POWER / सपनों की उड़ान

 सपनों की उड़ान / @THE_WOMAN_POWER

जहां आज के समय मे बड़े , बुजुर्ग, बच्चों के हाथ में मोबाइल , आते ही , वे सभी उस मोबाइल का दुरूपयोग पहले करते हैं / तमाम फेक चैटिंग , अश्लील विडियो , गेम आदि में अपना कीमती समय और डाटा नष्ट करते हैं / वही पर कुछ गिने चुने लोग , जिन्हें समय की कीमत पता  है, अपने सपनों का महत्त्व पता है , और अगर उन्हें कोई वस्तु बड़ी मुश्किल से मिली है तो उसका भी महत्त्व पता है/ ऐसे ही लोग अपने सपनों को साकार करने में यकीनन कामयाब होते हैं /

कहते हैं अगर सीखने की ललक हो ,और सपनों को पाने की चाह हो , तो कोई भी परिस्थितियां किसी को अपना दास नहीं बना सकती हैं / 

एक लड़की सोनाली की सच्ची कहानी

ये सच्ची कहानी है एक गरीब लड़की सोनाली की , जिसने मेहंदी लगाने की कभी कोई ट्रेनिंग नहीं ली  और मेहंदी आर्टिस्ट बन गयी , क्योकि उसके पास इतने पैसे नहीं थे कि वह किसी सेंटर में सीख सके / बमुश्किल किसी तरह सोनाली ने 7वी कक्षा तक पढ़ाई की , क्योकि इस कक्षा तक फीस नहीं लगती थी , लेकिन आगे की कक्षाओं में फीस देना पड़ता जो उसके पास नहीं थे तो इसी कारण उसकी पढ़ाई यही पर समाप्त हो गयी / लेकिन उसके मन की तीव्र इक्षा थी मेहंदी लगाना सीखना / उसे यह काम बहुत पसंद था /

मेहंदी सीखने के लिए पैसे नहीं थे

चूंकि सोनाली को मेहंदी लगाना बहुत पसंद था , और वह हर हाल में इसे सीखना चाहती थी , लेकिन पैसे न होने के कारण वह किसी क्लास को ज्वाइन नहीं कर सकती थी / लेकीन उसके मन में जो एक सपना था वह रह रह के उसे परेशान करता था / लेकिन कहते हैं जहां चाह ,वहां राह /

चूंकि सोनाली मुंबई में रहती थी , तो उसने मेहंदी लगाने की शुरुवात ब्लाक मेहंदी से की थी / वहां पर सेलिब्रेटी और विदेशी पर्यटक वगैरह आते ही हैं ,तो ब्लाक मेहंदी के द्वारा उसका काम चलने लगा /

लेकिन सिर्फ बालों में मेहदी लगाना ही पर्याप्त नहीं था ,और सोनाली के मन में जो मेहंदी लगाने का सपना था, वो रह रह कर उबाल खाता ही था और सोनाली भी इसे जीवित ही रखना चाहती थी / इसीलिए उसने अपने इस सपने को अपने से दूर नहीं होने दिया /

बिना किसी ट्रेनिंग के मोबाइल से मेहंदी लगाना सीखी

जब उसकी शादी हो गयी तो पति नें उसे एक मोबाइल गिफ्ट किया / अब जरा आप सोचिए कि अगर आपके हाथों में ये डिवाइस हो तो आप क्या करोगे ? वही जो अकसर लोग करते हैं , फ़ोकट की चैटिंग , फालतू की विडियो देखना , गपशप करना , कुल मिलकर टाइम पास करना /

पर यहाँ पर सोनाली ने ऐसा कुछ भी नहीं किया /उसने उसी मोबाइल से ही तमाम मेहंदी लगाने की डिजाइनों को सीखना शुरू किया / और धीरे धीरे करके वह हर प्रकार के मेहंदी लगाने की डिजाइन में निपुण हो गयी /

एक समय ऐसा भी था जब सोनाली का आत्मबल बहुत ही कमजोर पड़ गया था , क्योकि वह अपने सपनों को पाना चाहती थी , लेकिन आर्थिक तंगी और तमाम हालातों के कारण वह कुछ कर नहीं पा रही थी / लेकिन उसी सोनाली ने अवसर को पहचाना ,और सिर्फ एक मोबाइल की सहायता से अपने सपनों को सच कर दिखाया / सोनाली आज ब्राइडल मेहंदी भी लगा रही है ,और दुल्हनों का गेट उप तैयार करके अच्छा पैसा कमा रही है /

इस बात से एक बात से तो समझ आती है कि ..

हुनर किसी का मोहताज नहीं होता ,कोई पैदा होते ही सरताज नहीं होता , हर किसी के सर पर ताज नहीं होता

जो रखता है खुद पर विश्वास , वह कभी किसी का मोहताज नहीं होता /

इस प्रकार इस संसार में अभी भी ऐसे नायब हीरे पड़े हैं ,जिन्हें न विपत्तियाँ हरा सकती हैं , न परिस्थितियां झुका सकती हैं / उन्हें सिर्फ होता है अपने सपनों से प्यार और वे इसे पाने के लिए कुछ भी कर सकते हैं /

अगर आपके मन में भी ऐसी कोई अभिलाषा है , कोई सपना है जिसमें आप वास्तव में जीना चाहते हैं , तो अवसरों को तलाश  करिए , हार न मानिए, तो कोई भी लक्ष्य आपके लिए असंभव नहीं है /

अगर किसी चीज को शिद्दत से चाहो तो पूरी कायनात तुम्हें उससे मिलाने में लग जाती है

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जय हिन्द 

 

 


  

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

शुक्रवार, 9 जुलाई 2021

संकल्प और जिद की अद्भुत कहानी/ THE STORY OF BROOKLYN BRIDGE / जिद

 NO PAIN , NO GAIN  @THE_STORY_OF_BROOKLYN_BRIDGE, एक जिद जिसने कर दिखाया

बिना परेशान हुए , बिना संघर्ष किए सफलता कभी नहीं मिलती / NO PAIN , NO GAIN .

एक बार सोचकर देखिए , यदि आप हारकर बैठ गए ,तो जीत स्वयं आकर गले में वरमाला डाल देगी क्या ? नहीं ना !!

हर व्यक्ति सपने देखता है / हर व्यक्ति चाहता है कि, वह सबसे ऊंची चोटी पर पहुंचे / हर व्यक्ति की ख्वाहिश होती है कि, वह अन्य सभी से श्रेष्ठ बने , लेकिन क्या हर व्यक्ति ऐसा कर पाता है ?

ध्यान रखे , जीत की राह में अड़चने ही अड़चने हैं / जीत की डगर बहुत कठिन है / कई बार ‘हार’ भी झेलनी पड़ती है / लेकिन जिसने भी इस हार को प्रेम से गले लगाया , लेकिन स्वयं के ‘संकल्प’ पर हावी नहीं होने दिया , अंततः जीत उसी की होगी /

तो जीतने के लिए जिद तो करना पड़ेगा /

अपनी योग्यता के अनुसार ही जिद करें ---- जिद का मतलब बच्चों वाली जिद नहीं है / आपको जिद के व्यवहारिक महत्त्व को समझना होगा / जिद करना , संकल्प करना , लक्ष्य निर्धारित करना , मन में कुछ विशेष करने की ठान लेना ,ये सब आपकी चारित्रिक विशेषता को व्यक्त करता है / लेकिन आपके द्वारा लिया गया संकल्प ,आपकी सामर्थ्य या आपकी योग्यता के अनुसार है या नहीं ये देखना चाहिए /

बहुत सी कहावतें हैं कि असंभव कुछ भी नहीं / इंसान अगर एक बार ठान लें ,तो क्या कुछ नहीं कर सकता है आदि सभी सच हैं /

लेकिन कैसे ?

एक व्यक्ति की चाह अगर एवरेस्ट की चोटी पर चढ़ाई करने की है , तो क्या वो बिना किसी ट्रेनिंग के एवरेस्ट पर चढ़ जाएगा ? बिना छोटी छोटी पर्वत श्रृंखलाओं पर चढ़ने की आदत और बिना छोटी छोटी जीत की आदत के एवरेस्ट पर चढ़ना संभव है ? कभी नहीं /

इसी प्रकार एक व्यक्ति अगर बाक्सिंग में विश्व विजेता बनने की जिद कर बैठे , तो उसे पहले क्या करना होगा ? उसे पहले जिला ,फिर राज्य, फिर राष्ट्रीय स्तर की बाक्सिंग चैम्पियन शिप जीतनी होगी / सीधे विश्व विजेता से लड़ने की ,न तो उसे अनुमति मिलेगी, और न ही वह ऐसा कर ही पाएगा /

अर्थात किसी भी लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए अपनी योग्यता में वृद्धि करनी चाहिए , और उसे एक बार में नहीं बल्कि धीरे धीरे ही की जा सकती है / प्रत्येक व्यक्ति में सामर्थ्य अकूत है , लेकिन वो सामर्थ्य वृद्धिदर ,आपकी लगन, निष्ठा, मेहनत, शिक्षा आदि पर निर्भर करती है /

जीत के लिए खुद से वायदा करिए ---

जीत के लिए खुद को एक विजेता के जैसा तैयार भी करना पड़ता है / याद रखिए जब आप कोई भी संकल्प करते हैं , या स्वयं से जीतने का वायदा करते हैं , तो दूसरा आपका अवलोकन नहीं करता है / आप स्वयं के ‘वायदाकर्ता’ हैं ,और खुद के ही ‘पर्वेक्षक’ हैं/ इसीलिए जब भी आप कोई संकल्प लें ,तो आप स्वयं के प्रति ईमानदार रहें /

अक्सरतः लोग करते क्या हैं ?   

कोई लुभावनी चीज देखा , बिना अपनी योग्यता या सामर्थ्य को देखे / और जब उसमे कर्म करने का समय आता है, तो हम खुद से ही बहाने बनाने लगते हैं --- जैसे – आज मौसम ठीक नहीं है , अब कल कर लेंगे ,आज देर से उठा हूँ तो आज कुछ काम तो हो नहीं पाएगा, ये अब मुझसे नहीं होगा / आदि इस प्रकार के हजारों बहानें खुद से ही बनाने लगते हैं / जब आप खुद से ही बेईमानी करेंगे तो सफलता कहाँ से मिलेगी ?

एक बात याद रखने योग्य है आज के युग में जीत निरपेक्ष नहीं है बल्कि सापेक्ष है / इन बहानों से जो आप समय को नष्ट करते हैं, उसी समय का सदुपयोग करके कोई आपसे बेहतर होने की कोशिश में लगा हुआ है / तो सोचिए जीत किसकी होगी ? आपकी या आपसे बेहतर की /

जीत हमेशा मजबूत इक्षा शक्ति से ही मिलती है –

इतिहास में हजारों ऐसे उदहारण भरे पड़े हैं, जब लोग अपनी मजबूत इक्षा शक्ति के बल पर असंभव कार्य को भी संभव किया है /

एक मजबूत इक्षा शक्ति की सच्ची कहानी –बुकलिन ब्रिज BROOKLYN BRIDGE

वर्ष 1883 में अमेरिका में एक इंजीनियर जॉन रैम्बलिंग के दिमाग में एक विचार आया / उन्होंने न्यूयार्क और लॉन्ग आइलैंड को जोड़ने वाला एक विशाल ब्रिज बनाने के बारे में सोचा / इस विचार के बारे में जॉन रैम्बलिंग नें अपने कुछ मित्र इंजीनियर्स से बात की / तो उन दोस्तों ने इसके लिए जॉन रैम्बलिग़ का मजाक बनाया, और इस प्रकार की सोच को मूर्खता पूर्ण बताया, और जाँन को बहुत समझाया कि इस प्रकार का पुल बनाना असंभव है /

जॉन रैम्बलिंग का मन इस बात की गवाही नहीं दे रहा था/ उनकी अंतरात्मा ये कहती थी कि वे इस ब्रिज को निश्चित रूप से बना सकते हैं / सबके मना करने के बावजूद भी जॉन नें अपनें पुत्र वाशिंगटन को साथ लिया और ब्रिज के निर्माण की योजना बनाने में जुट गए /

दोनों पिता पुत्र नें रात दिन एक करके इस ब्रिज के लिए सैकड़ो नक़्शे तैयार किए , और इस काम में आगे क्या क्या समस्याएँ आ सकती हैं ,उसके समाधान को ढूढते हुए आगे बढे /

मन में अति उत्साह , जूनून , लगन लिए वे असंभव से लगने वाले काम को संभव करने में लगे थे / महीनों काम सही चल रहा था / एक दिन अचानक निर्माण स्थल पर एक दुखद हादसा हो गया, जिसमें जॉन रैम्बलिंग की मृत्यु हो गयी , और इस हादसे में पुत्र वाशिंगटन के सिर पर इतनी गहरी चोट लगी कि वो चलने फिरने और बात करने के लायक ही नहीं रहे /

इस हादसे के बाद लोंगों ने भी तमाम प्रकार की ऊँट पटांग बातें करने लगे / किसी ने भी सकारात्मक बातें कभी नहीं की, और न ही वाशिंगटन की कभी हौसलाफजाई ही की सिवाय नकारात्मक बातों के /यह सब देखकर दूसरे साथी इंजीनियर्स ने भी अब अपने काम को समेटना ही उचित समझे /

शरीर काम करने लायक नहीं रह गया था / आवाज चली गयी थी , लेकिन इसके बावजूद वाशिंगटन हतोत्साहित नहीं हुए /वह अपंग होने के बाद भी दोगुने उत्साह और लगन के साथ एक बार फिर अपने पिता के सपने को पूरा करने में जुट गए /

अस्पताल में बेड पर लेटे लेटे सोच रहे थे कि वह अपना संदेश अपने इंजीनियर्स साथियों को कैसे दे / तभी उनके मन में एक विचार कौंध गया / उन्होंने अपनी पत्नी से अपनी अंगुली की सहायता से संवाद करने का एक तरीका खोज निकाला / और वे अपनी पत्नी की बांह पर अपनी अँगुलियों से टच करके संकेत करते या बांह पर उंगुलियों से लिखते और पत्नी इशारा समझकर इंजीनियर्स को बताती कि क्या करना है ? इस प्रकार से काम शुरू हो गया / वाशिंगटन अपनी अँगुलियों से अपनी पत्नी की बांह पर टच करके सांकेतिक भाषा में लिखते और पत्नी उन संकेतों को समझकर इंजीनियर्स को बताती / यही क्रम 13 वर्षों तक निरंतर चलता रहा ,और अंततः ब्रिज बनकर तैयार हो गया /

आज वह ब्रिज अमेरिका में ब्रुकलिन ब्रिज (BROOKLYN BRIDGE) के नाम से अपनी विराटता और कारीगरी के कारण प्रसिद्ध है /

ये सच्ची घटना हमें बहुत कुछ सिखाती है / जिन्हें लोग पागल समझते है वास्तव में दुनियां बदलने का माद्दा वही रखते हैं / इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि इंसान के अदम्य साहस इक्षाशक्ति और लगन के सामने हर परिस्थिति पराजित हो जाती है /

इसके साथ यह कहानी एक स्त्री के अपने पति के लिए प्रेम और समर्पण की कहानी भी सुनाता है / जो वर्षों तक अपने अपंग पति के संदेशो को अपनी बांह पर लेकर सभी इंजीनियर्स को बताती रही और 13 वर्षों तक पति के कार्य में पूरी लगन से लगी रही / और अपने पति के सपनों को पूरा किया /

अब आपको अपने अदम्य साहस से परिचित हो जाना चाहिए, कि आप क्या कर सकते हैं ? बस जरूरत है स्वयं पर विश्वास की , लगन की ,और एक शसक्त ईमानदार योजना की /

ये कहानी आपको कैसी लगी COMMENT BOX में COMMENT जरूर करें / इस पेज को FOLLOW करिए , जिससे हम आपके लिए नए नए हिस्टोरिकल और प्रेरणा दायक सच्ची कहानियाँ और कैरियर सम्बंधित लेख आप तक पहुचातें रहें /

जय हिन्द //

    

 

  

 

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