मंगलवार, 6 जुलाई 2021

POWER OF POSITIVE THINKING / wilma rudolph

 सोच की जीत , @विल्मारूडोल्फ , POWER_OF_THINKING,  जहां चाह वहां राह

 सोच को बदलो सितारे बदल जाएंगे ,नजर को बदलो नज़ारे बदल जाएंगे //

कश्तियाँ बदलने की जरूरत नहीं , दिशाओं को बदलो किनारे बदल जाएंगे //              

नेपोलियन हिल कहते हैं --- सफलता को किसी स्पष्टीकरण की आवश्यकता नहीं होती और असफलता के लिए कोई बहाना नहीं होता //

दोस्तों आज के इस अत्याधुनिक युग में जहाँ पर सर्व साधन सुलभ है / टेक्नालाजी चरम पर है, फिर भी लोग बेरोजगार हैं , और इससे भी ज्यादा हास्यास्पद तब होता है जब कुछ लोगों के मुख से सुना जाता है कि केवल पैसा ही पैसे को बना सकता है/

विल्मा रूडोल्फ जिसके बारे में अधिकतर लोग जानते हैं , फिर भी प्रकृति की उस सर्वोत्तम शक्ति को नहीं मानते हैं , जो आपके अन्दर निहित है / जिसके द्वारा दुनियां की हर एक वस्तु या कोई भी लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है, जिसे आप मन से चाहते हैं / वो शक्ति है ..कल्पना की शक्ति , आपकी सोच की शक्ति /

कहते हैं ..... जहां चाह वहां राह

समझते हैं एक सच्ची घटना के माध्यम से -----

विल्मा रूडोल्फ एक बेहद गरीब परिवार में जन्मी थी / जब वह 4 वर्ष की हुई , तो उसे भयंकर निमोनियां हो गया , जिसके कारण वह पोलियो ग्रस्त हो गयी ,और वह एक पैर से विकलांग हो गयी / डॉक्टर ने उसके पैर में ब्रेस पहना दिया और कहा कि, अब वह अपने इन पैरों से कभी नहीं चल पाएगी /

विल्मा रूडोल्फ की माँ नें अपनी बच्ची के मन में एक सकारात्मकता का बीज बो दिया / उन्होंने अपनी बच्ची से कहा कि तू जरूर चलेगी / तू हिम्मत न हार और खुद पर विश्वास रख /

विल्मा ने अपनी माँ से पूछा – माँ क्या मैं दौड़ भी सकूंगी, तो माँ ने कहा हाँ बेटा तू जरूर दौड़ेगी /

इस प्रकार से माँ ने बेटी को कदम कदम पर प्रोत्साहित किया / विल्मा रूडोल्फ पर अपनी माँ के उत्साह वर्धन का बहुत ही गहरा प्रभाव पड़ा और उसने भी ठान लिया कि  वह ऐसा करके दिखाएगी /

अब उसने अपने पैर से ब्रेस उतार दिया, और धीरे धीरे प्रतिदिन चलने का प्रयास करने लगी / कई बार गिरी , फिर उठी ,लेकिन हिम्मत नहीं हारी और अपने अथक प्रयास के बाद धीरे धीरे चलने लगी /

13 वर्ष की उम्र में अपने स्कूल की दौड़ में हिस्सा लेना शुरू किया, और बार बार पराजित हुई, लेकिन उसकी जिद नें वो भी दिन लाया जब वो प्रथम बार दौड़ में जीत भी गई /

और उसकी उम्मीदें और भी बढ़ गयी / 15 वर्ष की उम्र में वह वह TENNESSEE STATE UNIVERSITY पहुंची, और TEMPLE नामक एक कोच से मिली /

पता है आपको विल्मा ने कोच से क्या कहा ? सुनना चाहेंगे ? यकीन करेंगे आप ?

तो आगे पढ़िए ...

उसने कोच से कहा कि मैं दुनिया की सबसे तेज धाविका बनना चाहती हूँ/” कोच को यकीन नहीं हो रहा था / लेकिन विल्मा रूडोल्फ की लगन , निष्ठा और दृढ़ संकल्प को देखकर कोच ने कहा –

तुम्हें कोई नहीं रोक सकता तुम्हारे सपने पूरे करने से और मैं तुम्हारी मदद करूंगा , तुम्हें ट्रेनिंग दूंगा /”

वर्ष 1960, वह दिन भी आ गया , जिसका विल्मा रूडोल्फ को बेसब्री से इंतजार था / उसने 1960 के ओलम्पिक खेलों में हिस्सा लिया /

विल्मा का मुकाबला एक ऐसी धाविका से था , जिसने कभी भी कोई रेस हारी ही नहीं थी / नाम था जुत्ता हायने (JUTTA HEINE) /

रेस 100 मीटर की ---

अब पहली दौड़ 100 मीटर की हुई / विल्मा ने कभी न हार मानने वाली धाविका जुत्ता हायने को हरा दिया, और अपने जीवन का पहला स्वर्ण पदक जीत लिया /

रेस 200 मीटर की ---

अब दूसरी रेस थी 200 मीटर की / इस रेस में भी विल्मा के मुकाबले में एक बार फिर जुत्ता ही थी / अब इस रेस में भी विल्मा ने इस प्रकार दौड़ लगाई की उसने इस रेस को भी जीत लिया और दूसरा स्वर्ण पदक भी अपने नाम किया /

रेस 400 मीटर की ---

  अब बारी थी तीसरी रेस 400 मीटर की बेटन रिले रेस / इस रेस में भी जुत्ता हायने मुकाबले में थी / इस रेस के नियम में सबसे तेज धावक सबसे अंत में रखा जाता है / इस रेस में तीन धावकों के दौड़ने के बाद जब बेटन ,विल्मा को दिया गया तो बेटन विल्मा के हाथ से गिर गया , लेकिन विल्मा ने जुत्ता को आगे बढ़ते हुए देखा , तुरंत बैटन उठाया और इतनी तेज गति से मशीन की तरह दौड़ी और काँटे के मुकाबले में एक ऐतिहासिक जीत दर्ज की / और इसी के साथ अपने सपनों को  साकार करते हुए तीसरा स्वर्ण पदक जीत लिया /

        विल्मा रूडोल्फ ने सिर्फ जुत्ता हायने को ही नहीं हराया, बल्कि प्रकृति , भाग्य और परिस्थिति को भी हराया / आपको लगता है की एक विकलांग लड़की पूर्ण रूप से एक स्वस्थ रेसर को हरा दे, जिसने कभी कोई रेस हारी ही न हो ! लेकिन ये सच है उसने ऐसा कर दिखाया /

   प्रकृति और भाग्य ने विल्मा को विकलांग बनाया / परिस्थिति ने उसे गरीब बनाया था / डॉक्टर नें भी कह दिया था कि विल्मा अपने पैरों पर कभी नहीं चल पाएगी /

    लेकिन विल्मा रूडोल्फ का एक सपना , एक सोच ,एक स्वस्थ विचार जो उसने अपने मस्तिष्क के किसी कोने में बो दिया था / लगन ,जिद ,साहस ,निष्ठा आदि से विल्मा ने इस बीज को अंकुरित किया, और आगे तब तक सीचती रही जब तक की उसके सपनों का ये पेड़ हकीकत में नहीं बदल गया / जो आज और सदियों तक बहाने बनानें वाले और बात बात पर रोना रोनें वालों के गाल पर तमाचा है /

    इंसान गरीबी से नहीं हारता / इंसान परिस्थितियों से नहीं हारता / अगर वह हारता है तो बड़े सपने देखने से / अगर वह हारता है तो खुद पर विश्वास न करने से / अगर वह हारता है तो बहाने बनाने से, और खुद से ही झूठ बोलने से /

   बेरोजगारी , लाचारी , बीमारी ये इंसान के सामनें कुछ भी नहीं हैं अगर प्रत्येक इंसान सपने देखना शुरू करदे , उसे हकीकत में बदलने के लिए रात दिन एक कर दे / क्योकि विल्मा रूडोल्फ जैसी लड़की जो की अपंग थी / लेकिन दुनियां के सामने झुकना नहीं सीखा / अपने आपको लाचार और बेबस नहीं समझा /तो दोस्त आपके पास तो ईश्वर की दया से पांचो इन्द्रियाँ सुसज्जित हैं /

          जीतना है तो जिद करना पड़ेगा  , जीतना है तो ठानना पड़ेगा , जीतना है तो सीखना पड़ेगा /

           एक कामचोर कभी विजेता नहीं बनता और एक विजेता कभी इरादा नहीं छोड़ता //

 

ये कहानी आपको किस प्रकार प्रेरित करती है COMMENT BOX में COMMENT करके जरूर बताएं / PAGE को जरूर FOLLOW  करें, जिससे आगे के नए नए पोस्ट आपको आसानी से मिलते रहें /

जय हिन्द //     

 

 

रविवार, 4 जुलाई 2021

विजय संकल्प की विजय कहानी / VICTORY STORY OF STRONG WILL POWER

विजय संकल्प की विजय कहानी 

एक इक्षाशक्ति की दमदार कहानी—

एक बार एक पड़ोसी राज्य जो कि बहुत बड़ा और शक्तिशाली था, उसने अपने पड़ोसी एक छोटे से राज्य जो कि मुकाबले में हर प्रकार से कमजोर था पर आक्रमण करके उस पर कब्ज़ा करने का मन बना लिया था / और अगले ही दिन छोटे राज्य पर आक्रमण करने की योजना बना ली थी /

यह बात पड़ोसी राज्य के राजा को उनके गुप्तचरों ने बताई , और कहा महाराज कल हम पर आक्रमण होगा और हम सभी मारे जाएंगे / राजा को यह सुन कर बड़ा दुःख हुआ / अब राजा और उसके सभा में उपस्थिति सलाहकारों में विचार विमर्श होने लगा कि अपने राज्य को पड़ोसी राज्य के आक्रमण से कैसे बचाया जाए / सभी को कुछ भी समझ नहीं आ रहा था / तभी उनके सेनापति ने एक युक्ति निकाली / उसने कहा कि महाराज वह राज्य हम पर कल आक्रमण करेगा / वह हमसे बहुत ही शक्तिशाली है / उसके पास हमसे ज्यादा सैनिक और अस्त्र शस्त्र है / आमने सामने के युद्ध में हम उसकी सेना से किसी भी प्रकार नहीं जीत सकते और हमारी हार भी निश्चित है , क्योकि वे कल हमपर आक्रमण करेंगे, जिसके लिए वे आज तैयारी कर रहे होंगे /

अब हमारे पास एक ही विकल्प है और आज का ही समय है / हम आज रात ही उस राज्य पर आक्रमण कर देते हैं , क्योंकि अचानक हुए आक्रमण से उनकी सेना तैयार नहीं होगी और हम युद्ध जीत सकते हैं / हमारे पास मरने या मारने के सिवा और कोई चारा है भी नहीं, क्योकि कल तो हम वैसे ही मर जाएंगे / तो आकमण की पहल आज रात हमी लोग कर देते हैं / शायद जीत ही जाए /

मरता क्या न करता / राजा ने आक्रमण का आदेश दे दिया / अब पूरी सेना नदी के किनारे पर आ गयी / सेनापति ने शाम को अपनी सेना को नाव के द्वारा नदी के दूसरी तरफ भेजना शुरू किया / जब पूरी सेना नदी के दूसरी तरफ चली गयी तो  सेनापति खुद भी नाव से ही अपनी सेना के पास पहुँच गया  / सेना को कूंच का आदेश देते हुए सेनापति ने सारी नावों को आग के हवाले कर दिया , और अपनी सेना को संबोधित किया कि इन नावों में उठती हुए आग के लपटों को देख लो / इसका सीधा सा मतलब है कि , अब हमारे पास पीछे लौटने या भागने का कोई विकल्प नहीं है / अब या तो हमें लड़ कर जीतना है, और नहीं तो लड़ते लड़ते अपने प्राणों की आहुति दे देना है /

इतना सुनते ही सेना में जैसे साक्षात यमराज आ गए हों , और सेना भूखे शेरों की तरह विरोधी सेना पर टूट पड़ी , और उन्हें सँभलने और समझने का कोई मौका नहीं दिया / बड़े राज्य की सारी  सेना मारी गयी / और छोटे राज्य ने युद्ध जीत लिया /

इस प्रकार जब आप अपने पीछे लौटने के सारे रास्ते बंद कर देते हैं/ सिर्फ आपकी कल्पना की मजबूत इक्षा शक्ति जूनून में बदल जाती है और आप जीतने के लिए हर एक कीमत देने को तैयार हो जाते हैं, सिवाय पीछे लौटने के / तभी आपकी जीत सुनिश्चित हो जाती है /

शिकांगों की एक चर्चित कहानी ---

शिकांगों में एक बड़ी मार्किट में भयानक आग लग गयी थी / चारों तरफ सिर्फ आग ही आग और धुंआ ही धुंआ दिख रहा था / व्यापरियों का समूह एक तरफ खड़े होकर अपनी दूकानों को जलते हुए देख रहा था / और आपस में ये तय करने में लगे थे कि अब तो सब जल कर ख़ाक हो गया है / अब वे अपनी दूकानों का पुनर्निर्माण करें या शिकांगों छोड़ कर कही और चले जाएं /

अब सभी ने ये तय किया कि वे सभी अब शिकांगों छोड़ कर चले जाएंगे / लेकिन उनमे से एक व्यापारी ने फैसला लिया कि वह कहीं नहीं जाएगा और अपनी जली हुई दूकान का निर्माण करेगा /

उसने अपनी जलती हुई दूकान की तरफ ईशारा करते हुए कहा कि दोस्तों उस स्थान पर मैं दुनियां की सबसे बड़ी दूकान का निर्माण करूंगा / मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता कि यह कितनी बार जल जाती है /

वे महान सख्स थे मार्शल फील्ड/ लगभग 50 साल बाद उसी स्थान पर एक होल सेल की विशाल स्मारक तैयार हो गयी / जो आज भी अपनी गाथा विश्व में गा रही है /

मार्शल फील्ड और उनके साथियों में क्या फर्क था/ मार्शल फील्ड ने संकट के समय भी साहस न खोकर एक सपना देखा, भविष्य का सपना , एक बड़ी मार्किट बनाने का बीज अपने दिमाग में बो लिया / संकल्प किया , योजना बनाई और वो कर दिखाया जिसे आज तलक दुनियां जानती है /

वहीँ पर जलती हुई दूकान को देखकर साथी व्यापारियों ने आसान सा रास्ता चुना, और शहर छोड़ कर चले गए / इसीलिए दिमाग में कोई कल्पना न होने के कारण सब शून्य हो गए /

जीतने वाले अपने पीछे हटने का कोई विकल्प नहीं छोड़ते / और यही जिद उन्हें उनके लक्ष्य तक पहुंचा देती है /

ये और कुछ नहीं इंसान के बड़े सपने देखने की ताक़त और मजबूत इक्षा शक्ति का परिणाम है , जो उन्हें महान बनाती है / जब आप जीत के बदले में कुछ भी चुकाने के लिए तैयार हो जाते हैं, तब आप अपने सपनों को हर कीमत पर पाने के लिए तैयार हो जाते हैं /

धन कमाना हो या कुछ और लेकिन जब तक आपके पास सुनिश्चत लक्ष्य नहीं है , एक मजबूत इक्षा शक्ति और लक्ष्य को हर हाल में पाने का जूनून नहीं है , तब तक आप सफलता की कामना मत करिए /

अगर ये सब चीजे आपके पास हैं , तो नीचे दिए गए 6 कदमों पर चलकर आप निश्चित सफलता हासिल कर सकते हैं /

  • सटीक लक्ष्य या सटीक धन --  आप अपने मन में इच्छित लक्ष्य को निर्धारित कर लें/ मैं बहुत पैसा चाहता हूँ यह कहना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि जितना कमाना चाहते हैं उस राशि को सटीक मात्रा में तय करें / लक्ष्य आपका पक्का होना चाहिए /
  • बदले में क्या योगदान देंगे ये तय करें – अपने इक्षित लक्ष्य या धन को पाने के लिए बदले में वास्तव में क्या योगदान देने का इरादा रखते हैं निश्चित कीजिए / ये बाद याद रखिए ,बिना योगदान दिए या बिना बदले में कुछ दिए रिजल्ट संभव नहीं है / यानि सफलता के लिए बदले में देना तो पड़ेगा /
  • तारीख लिखिए --- वो तारीख निश्चित करिए , जब आप अपने लक्ष्य को हासिल करना चाहते हैं / ये बहुत ही जरूरी है / 
  • निश्चित योजना बनाइए --- अब बात आती है करने की / तो लक्ष्य तक पहुँचने के लिए योजना बनाइए ,और एक बार में शुरू करदें / अब तमाम अड़चने आएं पीछे न हटे, डटे रहें /
  • लक्ष्य ,योजना , कार्य प्रगति आदि सभी चीजे लिखिए --  आपके लक्ष्य या इच्छित सटीक राशि, प्राप्त करने की योजना , समय सीमा , लक्ष्य को प्राप्त करने के बदले में देने वाले योगदान आदि सारी चीजे एक डायरी में नोट करें /
  • सारी लिखी हुई चीजे पढ़े --- आपके द्वारा लिखी गयी सारी चीजे दिन में दो बार जोर जोर से पढ़े / सुबह जागने के बाद, रात में सोने के पहले / और ये महसूस करें और विश्वास करें कि वह लक्ष्य या वो पैसा आपके पास पहले से ही मौजूद है /

आपके सोचने की ताक़त आपके दिमाग का बीज है / और उसमें निरंतर खाद , पानी , हवा डालने पर एक दिन बड़ा पेड़ बन जाता है / बस आप लगातार काम करते रहें /

इसके अलावां जीवन में सफल होने का दूसरा मार्ग नहीं है / तो दोस्तों देर न करें / बड़े सपने देखना शुरू कीजिए, लक्ष्य निश्चित कीजिए , योजना बनाइए और पूरी दमदारी से जुट जाइए /

प्रत्येक असफलता अपने साथ एक समतुल्य सफलता का बीज लाती है/ 

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जय हिन्द //

 

शनिवार, 3 जुलाई 2021

SECRET OF SUCCESS / सफलता का रहस्य / लगन

 सफलता का सटीक रहस्य 

एक सत्य तथ्य थॉमस अल्वा एडिसन का ---

थॉमस अल्वा एडिसन बिजली के बल्व के अविष्कार से पहले 10 हजार बार से ज्यादा बार फेल हुए / वे बीसवी सदी के किसी अन्य अविष्कारक के मुकाबले ज्यादा बार असफल हुए / लेकिन वही एडिसन बाद में अपने युग के दूसरे  अविष्कारको की तुलना में सबसे ज्यादा प्रयोग किए ,और उनके द्वारा किए गए लगभग साढ़े तीन हजार अविष्कारों में 1093 अविष्कारों को पेटेंट भी मिला जो उस युग में अधिकतम था /

अमेरिका के प्रसिद्ध लेखक स्वेट मार्डेन की प्रेरक कहानी ---

स्वेट मार्डेन जो कि पुशिंग टू द फ्रंट किताब के लेखक हैं / अमेरिका के निवासी थे / 1895 में अमेरिका भयंकर मंदी की चपेट में था / इस मंदी में स्वेट मार्डेन का एक अपना होटल बिक गया / लेकिन सब कुछ ख़त्म हो जाने के बाद भी जहाँ अमेरिकी वासी निराशा , मायूसी और नकारात्मकता की तरफ बढ़ रहे थे , वही पर स्वेट मार्डेन का होटल बिकने के बाद भी वे मायूस न होकर अमेरिकी वासियों को प्रेरित करने के लिए उन्होंने एक पुस्तक लिखने का फैसला किया /

स्वेट मार्डेन ने एक अस्तबल के ऊपर एक कमरा किराए पर लिया , और साल भर रात दिन कड़ी मेहनत करके अपनी किताब लिखने में मशगूल हो गए / करीब साल भर बाद एक समय वो भी आ गया जब उन्होंने अपनी किताब का आखिरी पन्ना भी लिखा और इस तरह किताब लिखने का अपना सपना उन्होंने पूरा कर लिया /

चूंकि वे थके थे और भूख भी लगी थी , इसीलिए रात्रि का भोजन करने के लिए कमरे से थोड़ी दूर पर एक कैफे में चले गए /

जब वो भोजन करके करीब एक घंटे बाद वापस आते हैं , तो देखते हैं कि पूरे अस्तबल में आग लगी थी ,  और उसी में उनकी वर्षो की मेहनत खाक हो चुकी थी / इस प्रकार उनकी किताब जो कि उनका सपना था , जिसमे उन्होंने करीब एक साल काम किया, रात दिन जुटे रहे सब आग में जल गया /

अब उन्होंने कुछ देर तो सारा नजारा देखा फिर अपने आप को कंट्रोल किया और एक बार फिर उस किताब को दोबारा लिखने का संकल्प लिया / और पूरे मनोबल और लगन के साथ लिखना शुरू किए और एक साल में उस पुस्तक को दोबारा लिखने में सफल हो गए /

अब स्वेट मार्डेन उस पुस्तक को लेकर प्रकाशित कराने के लिए कई प्रकाशकों के पास गए / लेकिन उस भयानक मंदी में इस प्रकार की पुस्तक को प्रकाशित करने में किसी भी प्रकाशक ने रूचि नहीं दिखाई /फिर वो काम की तलाश और रहने के लिए शिकांगों चले गए / और वही एक नौकरी भी करने लगे /

एक दिन उन्होंने अपने एक दोस्त से अपने उस किताब के बारे में जिक्र किया / उस दोस्त की एक प्रकाशक से अच्छी खासी पहचान थी , अतः उसने किताब को प्रकाशित करवाने का प्रयास किया / और अपने दोस्त प्रकाशक के पास गया , और उस प्रकाशक ने उस किताब के प्रकाशन के लिए हामी भर ली /

इस किताब का मान था पुशिंग टू द फ्रंट / जो तमाम प्रयास के बाद वो किताब प्रकाशित भी हुई और देश की नंबर वन बेस्ट सेलर बुक बन गयी /

और इसी किताब को हेनरी फोर्ड , थॉमस एडिसन ,हार्वे फायर स्टोन और जे पी मॉर्गन जैसे दिग्गजों ने पढ़ी और प्रेरणा ली /

अमेरिका को बीसवी शताब्दी में लाने का श्रेय इसी जादुई किताब को जाता है /

सफलता की बस एक गारंटी – 

जरा सोचिए थॉमस अल्वा एडिसन एक या दो बार के असफल होने से हिम्मत हार कर बैठ जाते ,या अविष्कार करने का प्रयास छोड़ देते ,तो क्या आज आप एडिसन या उनके अविष्कारों के बारे में जानते ? क्या आज रात में जगमगाती रोशनी में रहते ?

स्वेट मार्डेन ने साल भर मेहनत किए / किताब लिखे , लेकिन किताब की सम्पूर्ण प्रतियाँ आग में जल गयी / अगर वे दोबारा उस पुस्तक को लिखने का संकल्प न लेते तो क्या आज वे महान बन पाते ? अमेरिकी वासी को उस किताब के रूप में क्या वो वरदान मिल पाता जिसके लिए आज वो किताब जानी जाती है /

जवाब है कभी नहीं /

क्योंकि इन महापुरुषों ने सिखाया कि जब भी किसी काम को हाथ में लो , तो बिना उसमे सफल हुए मानो नहीं / अर्थात कभी हार मत मानो , चाहे इसके लिए कोई भी कीमत क्यों न चुकानी पड़े /पूरी लगन के साथ निरंतर प्रयास करते रहो , जुटे रहो / एक न एक दिन सफलता आपके कदमों में झुक ही जाएगी / क्योकि असफलता से केवल एक कदम आगे ही सफलता होती है /

अर्थात सफलता की बस एक गारंटी है कि पूरी क्षमता और लगन के साथ जुटे रहो /

सफलता पाने के दो अनिवार्य गुण होते हैं ---

स्वेट मार्डेन के अनुसार सफलता पाने के लिए सिर्फ दो ही चीजे जरूरी होती हैं /

1. लक्ष्य तक पहुँचने का संकल्प

2. काम से चिपके रहने की आदत 

वह व्यक्ति कभी असफल नहीं हो सकता जिसे अपनी शक्ति का एहसास है , जो कभी हार नहीं मानता --- स्वेट मार्डेन

उस व्यक्ति के लिए कोई असफलता नहीं है, जो हर बार गिरने के बाद उठ खड़ा होता है/ जो रबर की गेंद की तरह गिरकर उछलता है / जो तब भी जुटा  रहता है, जब बाकी हर व्यक्ति हार मान लेता है / वो तब भी जुटा रहता है , जब बाकी हर व्यक्ति पीठ मोड़ लेता है /

राष्ट्रपति कैल्विन कूलिज के अनुसार सीक्रेट ऑफ़ सक्सेस --- 

दुनियां में कोई भी चीज लगन की जगह नहीं ले सकती , वो चाहे प्रतिभा हो , चाहे योग्यता हो या शिक्षा / क्योकि तमाम योग्यता होने पर भी असफल लोंगो का मिलना आम बात हो गयी है / प्रतिभाशाली लोग भी कही न कही बेकार ही हैं , अपुरस्कृत हैं /वही पर शिक्षित अपराधियों से दुनियां भरी पड़ी है / अर्थात इस सबके होने के बावजूद अगर आपके भीतर संकल्प और लगन नहीं है , तो सफलता आपसे कोसो दूर रहेगी /

विपत्ति हमारा इम्तिहान लेती है --- 

दुनिया का कोई ऐसा काम नहीं है , जिसमें विपत्तियाँ न आए, आप निराश न हों/ लेकिन जो व्यक्ति इस बात को भली भांति जानता है, कि समस्याएँ ,विपत्तियाँ, निराशाएं ये सामान्य और स्वाभाविक है/ और काम को शुरू करते ही इनसे मुकाबला होना तय है / वे कभी भी नहीं हारते और न ही मैदान छोड़ कर भागते हैं, बल्कि पूरी लगन के साथ उस विपत्ति पर टूट पड़ते हैं, और अपने अदम्य साहस से जीत हासिल करते हैं /

वहीँ दूसरे माइंड सेट के लोग समस्या आते ही काम को बीच में ही छोड़ देते हैं/ वे जीवन भर बिना समस्या वाले कामों को ढूढ़ते रहते हैं, जो पूर्णतः असंभव है / और ऐसे लोग औसत ही रह जाते हैं, सफल कभी नहीं होते हैं /

सफलता असफलता से बस एक कदम आगे मिलती है --- 

हेरोडोटस ने कहा था कि कुछ लोग अपनी योजनाएं तब छोड़ देते हैं, जब वे लगभग अपने लक्ष्य के बेहद करीब होते हैं / जबकि इसके विपरीत दूसरे लोग आखरी मिनट पर पहले से ज्यादा उत्साहपूर्ण कोशिशे करके विजय हासिल कर लेते हैं /

नेपोलियन हिल ने कहा है कि जब किसी व्यक्ति के जीवन में सफलता आती हैं, तो इससे पहले उसका बहुत ही अस्थाई पराजयों से सामना होना तय है , और शायद कुछ असफलताओं से भी / जब पराजय किसी इन्सान पर हावी हो जाती है , तो सबसे आसान और तार्किक काम होता है, काम को छोड़ देना / और यही ज्यादातर लोग करते हैं /

तो मित्रों सफलता और असफलता एक सिक्के के दो पहलू हैं , लेकिन पूरी शिद्दत और लगन के साथ, कभी हार न मानने वाले संकल्प के साथ आगे बढ़ने वाला ही इन्सान सफल और कामयाब होता है /

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जय हिन्द // 

 

गुरुवार, 1 जुलाई 2021

HOW TO INCREASE YOUR SCORE IN YOUR JOB / अपने काम का स्कोर कैसे बढाए

 

HOW TO BUILD YOUR  SCORE IN YOUR JOB.

अपने काम में अपना स्कोर कैसे बढ़ाए ?

सफलता का एक खास नियम है कि आपसे जितना काम करने की अपेक्षा की जाती है , उसके बाद आप जितना काम करते हैं , उसके अनुपात में जीवन में आपकी सफलता तय होगी /

आपको अपनी आमदनी को दो गुना करना है ,तो आपको अपने काम के घंटे को बढ़ाना होगा / काम में गुणवत्ता लानी होगी / अधिक से अधिक काम करना होगा / प्रत्येक आने वाले अवसर को पहचानना होगा / आगे बढ़कर तेजी से उस काम पर जुट जाना होगा /

सफल लोग हमेशा कर्म केन्द्रित होते हैं / वे असफल लोगों से कहीं ज्यादा तेजी से काम करते हैं, और आगे बढ़ते हैं / वे ज्यादा से ज्यादा कोशिश और कड़ी मेहनत करते हैं / उनमें सुबह तड़के उठने की आदत होती है, और शाम को ज्यादा देर तक काम करते हैं / सफल लोग हमेशा गतिशील और प्रयत्नशील रहते हैं /

दूसरी तरफ असफल लोग आखिरी पल में काम शुरू करते हैं / ये अपना समय काफी बर्बाद करते हैं / और मौका मिलते ही तुरंत काम करना छोड़ देते हैं / इनका पूरा ध्यान कॉफ़ी ब्रेक , लंच ब्रेक , मेडिकल लीव , छुट्टियां और तनख्वाह पर रहती है / ये काम न करने के किसी भी बहाने को छोड़ते नहीं हैं /

सफल लोगों के विशेष गुण ---

सुबह जल्दी उठना – दुनिया भर के जितने भी सफलतम लोग हैं, उनमे सूरज से पहले उठने की आदत होती है / सूरज कभी भी उन्हें बिस्तर पर नहीं देख पाता /ये हमेशा सुबह तड़के उठते हैं /

भुगतान से ज्यादा काम करना – सफलतम लोंगो की खास आदतें होती हैं, ये हमेशा अधिकतम जिम्मेदारी लेने के लिए तैयार रहते हैं /जितना इन्हें भुगतान मिलता है, उससे कहीं ज्यादा काम करते हैं /

ये अवसर को कभी भी नहीं छोड़ते— चूंकि हर समय ये नई चुनौतियाँ और जिम्मेदारी लेने के लिए तैयार रहते हैं, इसलिए इन्हें अवसर भी अधिक मिलते है, लेकिन गलती से भी किसी भी हाथ आएं अवसर को गवांते नहीं हैं / ये अवसर को इस तरह झपटते हैं जैसे कुत्ता हड्डियों पर झपट्टा मारता है /

प्रत्येक काम का लक्ष्य और उसे पूरा करने की योजना – सफल लोगों का ये खास गुण होता है कि, उनके पास करने के लिए हमेशा कुछ न कुछ होता है, यानि लक्ष्य का निर्धारण पहले होता है फिर उसे अंजाम तक पहुचाने के लिए ACTION PLAN होता है / ये कभी कोई काम हवा में या चलतू मार्का नहीं करते हैं /

सफल लोंगो के प्रत्येक काम दिमाग के साथ पन्नों पर होता है – सफल लोंगो की ये आदतें इन्हें असफल लोंगो से अलग करती हैं / ये अपने लक्ष्य को और ACTION PLAN को अपनी डायरी पर लिखते जरूर हैं /इनके काम से सम्बंधित सारी योजनाएं, उसकी डेड लाइन, सारा ब्लू प्रिंट दिमाग के साथ पन्ने पर दर्ज होता है /  और रोज रात्रि में सोने से पहले इसकी बारीकी से समीक्षा जरूर करते हैं /

हमेशा ACTIVE और व्यस्त रहते हैं – सफल लोगों का प्रत्येक क्षण उनके लिए बेहद कीमती होता है / इसलिए सफल होने के लिए सभी जरूरी चीजों पर कठिन मेहनत करते हैं / और हमेशा व्यस्त रहते हैं / समय की बर्बादी इनके लिए किसी खजाने की बर्बादी जैसे होता है /

किताबें इनकी दोस्त होती हैं – भारत या विश्व के जितने भी बड़े व्यवसाई या बड़े ओहदे पर पहुंचे व्यक्तियों के बारे में अगर आप पढेंगे उनके सफल होने का  ये खास सीक्रेट है , कि दिन में कम से कम एक घंटा ये किताबों में समय बिताते हैं / अपने को UPDATE करने के लिए ये लोग किताबें जरूर पढ़ते हैं / मैंने सोनू शर्मा जी का एक इंटरव्यू सुना था जिसमे उन्होंने बताया कि समय न मिलने के कारण वे अपने WASH ROOM में ही एक छोटी से लाइब्रेरी बनाए हैं/ लेकिन पढ़ने का मौका नहीं छोड़ते / वारेन वफट , मुकेश अम्बानी , संदीप महेश्वरी ,टाटा अदि जितने भी सफलतम लोग हैं , वे प्रतिदिन नयी नयी जानकारियों या ज्ञान के लिए पढ़ते जरूर हैं /

किताबों के बारे में तो मेरा मानना है कि अगर आपको जल्दी और निश्चित सफलता पानी है, तो जितनी जल्दी हो सके किताबों से दोस्ती कर ले /

सफल होने तक जुटते रहते हैं – एक सफलतम इन्सान कभी हार न मानने वाले संकल्प के साथ जीता है / जो भी काम हाथ में लेता है , एक दृढ़ संकल्प के साथ एक निश्चित समय में जरूर पूरा करता है / जब तक उसे सफलता नहीं मिल जाती तब तक वो उस काम में वो जुटा रहता है /

एक असफलता की कहानी –

एक स्कूल में दो अध्यापिकाएं थी / दोनों एक ही तरफ से आती थी / उनकी एक आदत थी स्कूल में लेट आने की / वे हमेशा मोर्निंग प्रेयर के बाद ही स्कूल में पहुंचती थी / इसके लिए प्रिंसिपल ने उन्हें कई बार वार्निंग भी दी , कई बार समझाया भी / इसके लिए उनके पास रेडीमेड एक जवाब होता था , क्या करे SIR घर से तो समय से निकलते हैं, पर रास्ते में रेलवे क्रासिंग बंद होने के कारण लम्बा ट्रैफिक जाम रहता है इसके बावजूद भी तो किसी तरह तो इस समय तक हम स्कूल पहुँच जाते हैं / मानों जैसे वे स्कूल , प्रिंसिपल और बच्चों पर एहसान करते हों / इसके लिए उन्हें कई बार कहा गया कि आप और पहले घर से निकला करिए , लेकिन इसके लिए भी उनके पास बहाने थे /  उनकी शिकायते अभिभावकों के द्वारा हमेशा आती थी / इसके लिए भी उन्हें वार्निंग दी गयी / काम करना तो उनके लिए जैसे ड्यूटी बजाना मात्र था / छुट्टी होने के बाद बच्चों से पहले वही चली जाती थी / अंततः आखिर स्कूल ने उन्हें निकाल ही दिया / और वे अध्यापिकाएं आज तलक कहीं भी सफल नहीं हैं /

ऐसी आदतें व्यक्ति को असफलता की ओर ही ले जाती हैं , एक बात हमेशा आपको याद रखनी चाहिए, कि बिना पहले योगदान(CONTRIBUTION) दिए आपको कुछ भी नहीं मिला सकता / ये प्री पेड सिम की तरह है / पहले टैरिफ में पैसा लगाइए उसके बाद ही बात करिए /

ऐसे ही भारत के सरकारी महकमों में देर से ऑफिस आना , काफी देर तक गपशप करना , अपने ग्राहकों पर ध्यान न देकर लगातार घंटो मोबाइल फ़ोन पर लगे रहना , लंच ब्रेक समय से करना , और समय से पहले ऑफिस छोड़ देना आम बात है /

प्रत्येक प्रकार के जॉब वे चाहे ऑफिस वर्क हो या सेल्स हो उनके कर्मचारियों की एक बात आम है कि ,महीनों के शुरुवाती दो तीन सप्ताह चैन की बंसी बजाएंगे और फिर महीने के आखिरी सप्ताह में अचानक तूफानी गति से काम करने में जुट जाएंगे/ और अंत में हताशा और परेशानी से काम करते हैं , और किसी तरह अपना महीने का कोटा पूरा कर लेते हैं /

इस प्रकार का काम औसत दर्जे के लोंगों की औसत दर्जे के सोच को दर्शाता है / इस प्रकार के लोग न तो अपना ही भला कर सकते है न देश का /

जबकि शीर्षस्थ और सफल लोग ऐसा नहीं करते हैं / वे लोग महीने के पहले दिन भी उतनी ही एकाग्रता और शिद्दत से काम करते हैं , जितना उन्होंने पिछले महीने के आखिरी दिन किया था /

आपके जीवन में हर महान सफलता आपके लगन का परिणाम होती है / आप क्या चाहते हैं, आपमे ये निर्णय लेने की योग्यता होनी चाहिए / इसके बाद आप काम शुरू कर देते हैं , और फिर तमाम बाधाओं और मुश्किलों के बावजूद आप तब तक जुटे रहते हैं , जब तक की अपने लक्ष्यों को हासिल न कर लें / 

मेरी सफलता हर एक दिन हाथ वाले काम पर कड़ी मेहनत करने का परिणाम है __ जानी कासिम 

उठो ,जागो और आगे बढ़ो ,और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य की प्राप्ति न हो जाए __  स्वामी विवेकानंद

एक सलाह – काम न करके पछतावे का दर्द लेना चाहते हैं या काम करके मेहनत का दर्द ! दर्द तो दोनों तरफ है लेकिन कौन सा दर्द ज्यादा घातक है ये सोचना आपका काम है    SONUSIR

 

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जय हिन्द //  

 

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